गुना

सांसद केपी यादव बोले- हमें कोई भी कम आंकने की कोशिश न करे। हम जिंदा लोग हैं। हमारा भी स्वाभिमान है, उसूल हैं।” सिंधिया के खिलाफ फिर हुए मुखर, उनके प्रतिनिधि बोले- चमचे उचक रहे हैं

गुना डेस्क :

गुना सांसद केपी यादव एक बार फिर चर्चाओं में हैं। किसी न किसी बहाने से ज्योतिरादित्य सिंधिया पर टिप्पणी करने से नहीं चूकते। इस बार फिर उन्होंने बिना नाम लिए सिंधिया पर कटाक्ष किया। कुछ-कुछ अंतराल के बाद उनके इस तरह के बयान लगातार सामने आते रहते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि एक ही पार्टी में होने के बाद भी सिंधिया से उनकी पटरी नहीं बैठ रही।

पहले पढ़िये उन्होंने क्या कहा…शनिवार को वह यादव समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम में शामिल होने गुना पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ” जितना समय आपके बीच रहूंगा ..पहले के सांसद तो अपनी गाड़ी का कांच तक नीचे नहीं उतारते थे। यहां कुछ लोगों को मैं रास नहीं आ रहा हूं। पिछड़े वर्ग का सांसद बना तो पेट में दर्द होना तय है। मेरे खिलाफ साजिश रची जाती है, लेकिन हम कृष्ण के वंशज हैं। इतिहास भी हम ही बनाएंगे। कई कार्यक्रमों के बारे में मुझे बताया नहीं जाता, कई भूमिपूजन हो जाते हैं जो मैंने स्वीकृत कराए हैं। मैं साजिश रचने वालों को कहना चाहता हूँ कि मैं इस माटी का बेटा हूं। पत्थरों पर भले ही मेरा नाम मत लिखना लोगों के दिलों पर मेरा नाम लिखा है। कुछ लोग कहते हैं- उसूलों पर आंच आये तो टकराना जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है। हमें कोई भी कम आंकने की कोशिश न करे। हम जिंदा लोग हैं। हमारा भी स्वाभिमान है, उसूल हैं।”

देश 100 साल पहले आजाद हो गया होता

शनिवार को ही सांसद केपी यादव एक और कार्यक्रम में शामिल हुए। पीजी कॉलेज में आयोजित क्रीड़ा भर्ती के वीरमाता जीजाबाई सम्मान समारोह में उन्होंने बिना नाम लिए सिंधिया पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि “अनादिकाल से ही मातृशक्ति का हमारे देश में हमेशा से ही सम्मान रहा है। चाहे जीजा माता हों, चाहे रानी लक्ष्मीबाई हों, इन्हें कभी भूल सकते। रानी लक्ष्मीबाई भी हमारे पास झांसी की ही थीं। और उनके शौर्य के बारे में भी हम सभी जानते हैं। हम ये भी जानते हैं कि अगर उस समय कुछ लोगों ने उनके साथ गद्दारी नहीं कि होती, तो शायद देश स्वतंत्रता की 175वी वर्षगांठ मना रहा होता। यानी हम 100 साल पहले ही आजाद हो गए होते।”

उनके बयान के बाद यादव समाज का रिएक्शन भी आया। कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि सांसद केपी यादव ने सामाजिक मंच का उपयोग राजनैतिक लाभ के लिए किया है। यादव महासभा के ज़िलाध्यक्ष विष्णुप्रताप सिंह यादव ने यादव समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में दिए गए सांसद केपी यादव के वक्तव्य की निंदा की है।

उन्होंने वीडियो जारी करते हुए कहा है कि उनके संगठन ने समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करने की लिए कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें सांसद केपी यादव भी मौजूद थे। दुख की बात है कि उन्होंने सामाजिक मंच को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से जो बातें की है। उससे सभी समाजजनों में नाराजगी है। सांसद ने समाज हित में बात नहीं की, बल्कि राजनीति चमकाने के लिए अनर्गल बातें की हैं, जी निंदनीय है।

विष्णुप्रताप सिंह यादव का बयान आने के बाद ही यादव समाज के दूसरे नेता भी एक्टिव हो गए। केपी यादव समर्थक नेताओं ने इस बयान को समाज के ऊपर ले लिया। इसके बाद उनकी तरफ से भी ताबड़तोड़ बयानबाजी शुरू हो गयी। सांसद केपी यादव के प्रतिनिधि राजू यादव ने भी प्रेस वार्ता लेकर अपना पक्ष रख दिया। उन्होंने सांसद के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी समाज के खिलाफ कुछ नहीं बोला।

राजू यादव ने बताया कि “सांसद ने सभी समाजों के सम्मान में पार्टी की गरिमा को रखते हुए यादव समाज के अपने परिवार के मंच से कहा आज आदिवासी समाज की महिला राष्ट्रपति है। यादव समाज से आपका बेटा सांसद है। धाकड़ समाज का बेटा मुख्यमंत्री है। सांसद ने सभी समाजों का मान सम्मान बढ़ाया है कोई गलत बात नहीं की है। बैनरों में फोटो और शिलापट्टिकाओं में नाम न होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये कार्य छोटी सोच के नेता कर रहे हैं। अपनी चमचागिरी सिद्ध करने, अपने आका को खुश करने के लिए ये छोटी हरकतें करते रहते हैं। ये तो चमचे उचक रहे हैं, उचकने दो।”

आखिर क्यों नाराज हैं केपी यादव?

-सिंधिया समर्थक विधायक बिजेंद्र सिंह यादव के मंत्री बनने के बाद यादवों में दो नेता हो गए।

– मुंगावली के ही अजय यादव को निगम में नियुक्ति मिली। पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष बनाये गए। विधानसभा चुनाव में उनसे भाजपा ने वादा किया था।

– सांसद केपी यादव के गृह जिले में ही भाजपा ने तीन यादव नेता खड़े किये।

– शिलापट्टिकाओं में नाम नहीं दिए जाने का आरोप सांसद लगाते रहे हैं।

– कार्यक्रमों में आमंत्रण न देने का आरोप लगाते रहे हैं।

राजनैतिक जानकर बताते हैं कि हो सकता है केपी यादव दूसरी संभावनाएं तलाश रहे हैं। कुछ समय पहले ही उनके छोटे भाई कांग्रेस के साथ हो लिए। उनके पिता भी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं। केपी यादव खुद भी 2018 से पहले तक कांग्रेस में ही रहे हैं। वहीं, शायद केपी यादव को यह लग रहा है कि जिस तरह का वेटेज ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में मिल रहा है। अगर वह आने वाले समय मे गुना से चुनाव लड़ना चाहेंगे, तो पार्टी उन्हें ही प्राथमिकता देगी। ऐसी स्थिति में केपी यादव शायद अपने लिए दूसरी संभावनाएं तलाश रहे हों।

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