*ग्राउंड रिपोर्ट* 3.12 करोड़ के आनंदपुर बाईपास निर्माण पर उठे सवाल: मुरम-कोपरा की जगह पीली मिट्टी डालने का आरोप

आनंदपुर डेस्क: सीताराम वाघेला
क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित आनंदपुर बाईपास सड़क का निर्माण कार्य शुरू होते ही विवादों में घिर गया है। करीब 3 करोड़ 12 लाख रुपए की लागत से बन रहे इस बाईपास की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए मुरम और कोपरा जैसी मजबूत सामग्री के बजाय बड़े पैमाने पर पीली मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

जानकारी के अनुसार लगभग 2 किलोमीटर लंबी और 12 मीटर चौड़ी इस सड़क का निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है। लेकिन निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही सामग्री को देखकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि सड़क की सबसे महत्वपूर्ण बेस लेयर में गुणवत्तायुक्त मुरम और कोपरा का उपयोग किया जाना चाहिए था, ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे। इसके विपरीत अधिकांश हिस्सों में पीली मिट्टी डालकर भराव किया जा रहा है, जो बारिश के मौसम में आसानी से धंस सकती है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क की वास्तविक चौड़ाई भी स्वीकृत मापदंडों से कम दिखाई दे रही है। वहीं निर्माणाधीन पुलियाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पुलियाओं के निर्माण के बाद आवश्यक तराई नहीं की गई, जिससे उनकी मजबूती प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना में यदि प्रारंभिक स्तर पर ही लापरवाही बरती गई तो भविष्य में शासन की राशि और जनता की उम्मीदों दोनों को नुकसान होगा।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि निर्माण कार्य में सुधार नहीं किया गया तो डामरीकरण के बाद पहली ही बारिश में सड़क की गुणवत्ता की पोल खुल सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

इधर निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार धर्मेंद्र पालीवाल ने कहा कि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा है और कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश नजदीक आ जाने के कारण बारिश के बाद ही इसका डामरीकरण कर पाना संभव हो पाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे बाईपास में यदि अभी से गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह सड़क जनता की सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन सकती है। ग्रामीणों ने स्वतंत्र तकनीकी जांच कराकर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सार्वजनिक करने की मांग की है।



