विदिशा

65 वर्षों से जीवंत आस्था का मंच: मुक्ता खेड़ा की रामलीला ने संजोई संस्कृति, परंपरा और श्रद्धा की विरासत

रावण वध, श्रीराम राज्याभिषेक और विशाल प्रसादी के साथ संपन्न हुआ ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव

आनंदपुर डेस्क :

मुक्ता खेड़ा में पिछले लगभग छह दशकों से अधिक समय से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का एक और गौरवपूर्ण अध्याय सोमवार को पूर्ण हुआ। 19 मई से 2 जून तक आयोजित श्री रामलीला महोत्सव का समापन रावण वध, भगवान श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक और विशाल प्रसादी वितरण के साथ श्रद्धा एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ अर्जित किया।

ग्राम मुक्ता खेड़ा में वर्ष 1960 से लगातार रामलीला मंचन की परंपरा चली आ रही है। यह आयोजन आज भी ग्रामीणों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बना हुआ है। ग्राम के वरिष्ठ नागरिक 80 वर्षीय लालाराम ओझा ने बताया कि प्रारंभिक दौर में रामलीला का मंचन मशालों और कैरोसिन गैस की रोशनी में बिना ध्वनि विस्तारक यंत्रों के किया जाता था। सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता था।

वरिष्ठ नागरिक मथुरालाल शर्मा ने बताया कि उस समय रामलीला देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे। दर्शक पूरी रात रामकथा का आनंद लेते और कई बार सुबह होने तक मंच के सामने डटे रहते थे।
ग्राम के शिवचरण शर्मा ने बताया कि स्वर्गीय प्रेमनारायण शर्मा रामलीला आयोजन के प्रमुख स्तंभ थे। वे कलाकारों और कथावाचकों को लाने के लिए बैलगाड़ी से 50 से 60 किलोमीटर तक की यात्रा करते थे। उनके समर्पण और परिश्रम के कारण ही उस समय यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो पाता था।

रामलीला समिति के अध्यक्ष प्यारेलाल शर्मा ने बताया कि वर्ष 1994 में ग्राम में हुई एक दुखद डकैती की घटना के बाद रामलीला का मंचन बंद हो गया था। इस घटना में आयोजन के प्रमुख सूत्रधार और उत्कृष्ट कलाकार रामस्वरूप शर्मा की डकैतों द्वारा हत्या कर दी गई थी। वे रामलीला में रावण और महाराज दशरथ जैसे महत्वपूर्ण पात्रों का प्रभावशाली अभिनय करते थे। उनकी मृत्यु से ग्रामवासी गहरे सदमे में आ गए और लगभग एक दशक तक रामलीला का आयोजन नहीं हो सका।

बाद में ग्रामवासियों के सहयोग और तत्कालीन सरपंच दिनेश शर्मा की पहल पर रामलीला का पुनः शुभारंभ किया गया। तब से यह आयोजन निरंतर जारी है और नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और आदर्श जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
समिति सदस्यों ने बताया कि देवीलाल शर्मा ने अपने जीवन में रामलीला के कई प्रमुख पात्रों का अभिनय किया है। शुरुआती वर्षों में उन्होंने भगवान श्रीराम की भूमिका निभाई, जबकि वर्तमान में वे महाराज दशरथ, महर्षि वशिष्ठ और जामवंत जैसे महत्वपूर्ण पात्रों का सशक्त मंचन कर रहे हैं।
समापन अवसर पर भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जय श्रीराम के उद्घोषों और भक्तिमय वातावरण के बीच विशाल प्रसादी वितरण किया गया। पूरे ग्राम में उत्सव जैसा माहौल रहा और श्रद्धालुओं ने आयोजन समिति की वर्षों पुरानी परंपरा को जीवंत बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की।

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