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प्रत्येक भारतीय को होगा गर्व, चीन की हो गई छुट्टी: BSNL पर काम आई PM Modi की ये सलाह

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BSNL 5G पर सबकी नजर है और खुद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इससे वीडियो कॉल की है। अब 4जी से संबंधित से एक नई जानकारी सामने आई है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि BSNL की तरफ से घरेलू इक्विप्मेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी जानकारी खुद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि BSNL 4G लागू करने के लिए जितने भी इक्विप्मेंट का इस्तेमाल किया जाए, वह सभी भारतीय होने चाहिए।

तेजस नेटवर्क से आने के बाद ये साफ हो गया है कि भारतीय कंपनियों के द्वारा इन्हीं इक्विप्मेंट्स का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए टाटा कंसेल्टेंसी सर्विस की तरफ से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही टाटा ने इसके लिए डेटा सेंटर भी बनाया है। यहां पर इससे संबंधित सभी काम किया जा रहा है। अक्टूबर के अंत तक 80 हजार टॉवर लगाए जाएंगे और इसके बाद 21 हजार साइट्स को अगले साल मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा।

टेलीकॉम पर कंपनियों की तरफ से काम किया जा रहा है और इसके लिए 1 लाख साइट्स को पूरा कर लिया जाएगा। एक बार ये काम पूरा करने के बाद BSNL का काम होगा कि वह 4G साइट्स को 5G नेटवर्क में तब्दील कर दे। सिंधिया ने कहा कि भारत ऐसा पांचवा देश बन गया है जो नया नेटवर्क लाने के लिए सभी इक्विप्मेंट्स अपने इस्तेमाल कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया था कि वह अपना खुद का 4G नेटवर्क स्थापित करने पर काम करेंगे। भारत अपनी तकनीक का इस्तेमाल करेगा और देशवासियों को 4G नेटवर्क का एक्सेस दिया जाएगा।

भारत की करीब 1 लाख साइट्स पर इसको लेकर काम किया जा रहा है। लेकिन एक बात भी साफ है कि बहुत जल्द इससे संबंधि 5जी नेटवर्क भी आने वाला है। क्योंकि खुद केंद्र सरकार इस पर काम कर रही है और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इससे कॉलिंग की है। लॉन्चिंग के सवाल पर सिंधिया ने कहा था कि हम मानते है कि BSNL का 5G लॉन्च होने में देरी हो रही है, लेकिन बहुत जल्द इसे लोगों के लिए ओपन कर दिया जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वह सबसे बेहतरीन 5G नेटवर्क लाने पर काम कर रहे हैं।

चीन को झटका

इससे चीन को भी झटका लगा है। क्योंकि टेलीकॉम इक्विप्मेंट के मामले में चीन का दबदबा है। बहुत सारी चीनी कंपनियों को इससे नुकसान भी हुआ है और इससे एक बात साफ हो गई है कि अब भारत को नेटवर्क स्टार्ट करने के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहना होगा।

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