मध्यप्रदेश

बेटे पर माता-पिता व बच्चे की जिम्मेदारी पत्नी को भरण-पोषण भत्ता नहीं दे सकते: फैमिली कोर्ट ने सुनाया फैसला

इंदौर डेस्क :

फैमिली कोर्ट ने पत्नी द्वारा भरण-पोषण भत्ता पति से दिलाए जाने को लेकर दायर परिवाद खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह कहा कि पति घर में अकेला कमाने वाला है। उसके ऊपर अपने माता-पिता और बेटे की जिम्मेदारी है। पत्नी ने एमबीए किया और वह खुद कमा रही है।

ऐसे में भरण-पोषण दिलाए जाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अधिवक्ता पंकज खंडेलवाल के मुताबिक फैमिली कोर्ट की प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश संगीता मदान के समक्ष इस परिवाद की सुनवाई हुई। अनुया नामक महिला ने पति सोमेश के खिलाफ परिवाद दायर किया था। इसमें उल्लेख किया था कि 14 अप्रैल 2014 को विवाह हुआ था। दंपती का एक बेटा है। शादी के बाद दोनों में विवाद होने लगे तो पत्नी अलग रहने लगी। दंपती का बेटा पिता और दादा-दादी के साथ रहने लगा।

कोर्ट ने माना पत्नी उच्च शिक्षित है खुद नौकरी कर रही है, सक्षम है

परिवाद में पत्नी की ओर से दलील दी गई कि पति 80 हजार रुपए महीना कमाता है। उससे गुजारा भत्ता दिलाया जाए। इधर, पति की ओर से अधिवक्ता खंडेलवाल ने जवाब पेश किया। इसमें कहा गया कि पत्नी ने एमबीए किया है। वह एक कार के शोरूम में नौकरी करती है, 18 से 20 हजार रुपए महीना कमा रही है। पत्नी द्वारा नौकरी किए जाने के प्रमाण भी कोर्ट में प्रस्तुत किए। सोमेश पर माता-पिता और बेटे की जिम्मेदारी है। 76 हजार से अधिक रुपए हर महीने खर्च हो रहे। एेसे में भरण-पोषण देने में सक्षम नहीं हूं। कोर्ट ने माना कि पत्नी खुद कमाने में सक्षम है। सभी पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया।

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