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एमपी बोर्ड परीक्षा: 10वीं की परीक्षा के पहले दिन दिखाई दी निर्भरता, आत्मनिर्भरता की तस्वीरें

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खरगोन जिले के वणी गांव के कैलाश टटवारे की इकलौती बेटी ममता के हाथ-पैर छह माह की उम्र में गल गए। परिजनों ने उसे करही, महेश्वर, बड़वाह, धामनोद, इंदौर सहित अन्य स्थानों के डाॅक्टर, हकीम व वैद्यों से इलाज कराया, पर कहीं से भी ममता की बीमारी ठीक नहीं हो पाई। इसके बाद भी न तो ममता ने हार मानी और न ही उसके माता-पिता ने।

परिजन ने उसका स्कूल में एडमिशन करा दिया। शाला के शिक्षकों ने भी ममता का हौसला कम नहीं होने दिया। उसे सहयोग कर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। बुधवार से ममता के कक्षा दसवीं बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हुईं। वह कोहनी से पेन पकड़कर परीक्षा की कॉपियों में प्रश्नों के उत्तर लिख रही है।

दमोह- अटेंडर नहीं मिलने से रोते हुए दो घंटे तक बैठी रही दिव्यांग छात्रा

परीक्षा केंद्र बांसातार खेड़ा में कक्षा 10वीं की दिव्यांग छात्रा भारती राठौर पेपर देने पहुंची, लेकिन अटेंडर न मिलने से वह बैठी रही। कुछ देर बाद फेल होने के डर से रोने लगी। जब परीक्षा खत्म होने में एक घंटे बचा था तो केंद्राध्यक्ष ने पास के गांव से कक्षा नाैवीं के छात्र को बुलाकर अटेंडर के रूप में बैठाया। जबकि दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग से अटेंडर की व्यवस्था करने का नियम है। वहीं केंद्राध्यक्ष ने बताया कि छात्रा धनगौर हायर सेकंडरी स्कूल की है। वहां से इसके दिव्यांग होने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी, जबकि धनगौर स्कूल के प्राचार्य बैजनाथ पांडे का कहना है कि छात्रा के परिजन को सूचना दी थी कि उसके लिए अलग से अटेंडर की व्यवस्था कर लें, लेकिन उन्होंेने ध्यान नहीं दिया।

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