न्यायालय के स्थगन आदेश की अनदेखी का आरोप: तहसीलदार के खिलाफ एसडीएम से जांच की मांग

आरोन डेस्क :
आरोन तहसील में पदस्थ तहसीलदार धीरेंद्र गुप्ता के खिलाफ न्यायालय के स्थगन आदेश की कथित अवहेलना करते हुए नामांतरण आदेश पारित करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। मामले में ग्राम पनवाड़ीहाट निवासी फरियादी अभिषेक रघुवंशी ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) आरोन को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोष सिद्ध होने पर विधि अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, फरियादी का पारिवारिक भूमि विवाद सिविल न्यायालय आरोन में विचाराधीन है। विवाद ग्राम पनवाड़ीहाट स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 38/2, रकबा 1.343 हेक्टेयर से संबंधित बताया गया है। फरियादी का कहना है कि सिविल न्यायालय ने प्रकरण क्रमांक 48/25 में 31 मार्च 2026 को संबंधित भूमि के संबंध में स्थगन आदेश जारी किया था।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद उक्त भूमि के नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, पहले याचिका प्रस्तुत कर नामांतरण आदेश कराया गया और बाद में लगभग एक माह पश्चात पुनः उसी भूमि के संबंध में नया नामांतरण आदेश पारित कर दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि तहसीलदार ने 4 जून 2026 को जारी सिविल न्यायालय के प्रमाणित स्थगन आदेश को स्वीकार करने के बावजूद नामांतरण संबंधी कार्रवाई की, जिससे न्यायालय के आदेश की अवहेलना हुई।
फरियादी ने आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई से उसे आर्थिक एवं कानूनी नुकसान पहुंचा है। साथ ही शिकायत में तहसीलदार के आचरण को न्यायालय की अवमानना, प्रशासनिक अनियमितता तथा लोकसेवक के दायित्वों के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने एसडीएम से अनुरोध किया है कि संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए और यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य लागू प्रशासनिक एवं वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक प्रकरण में निष्पक्षता बनाए रखने की भी मांग की गई है।
हालांकि, इस मामले में तहसीलदार धीरेंद्र गुप्ता अथवा प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।



