एक्सक्लूसिव- 25 साल बाद भी आनंदपुर को नहीं मिला बस स्टैंड: कड़ाके की ठंड, चिलचिलाती धूप या बरसता पानी यात्रियों को दौड़कर पकड़नी पढ़ती हैं बस
अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता बनी बड़ी बाधा

आनंदपुर डेस्क : सीताराम वाघेला
विदिशा जिले के आनंदपुर कस्बे की बदहाल तस्वीर की एक बड़ी मिसाल आज भी अधूरा पड़ा बस स्टैंड है। कड़ाके की ठंड, चिलचिलाती धूप हो या बारिश, यहां यात्रियों को सड़क पर खड़ी बसों के पीछे दौड़ लगाकर सफर करना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि लगभग 25 वर्ष पूर्व बस स्टैंड की विधिवत घोषणा और स्वीकृति मिलने के बावजूद आज तक इसका विकास नहीं हो सका। जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन क्षेत्र की दुर्दशा की कहानी जस की तस बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार करीब 25 साल पहले तत्कालीन स्थानीय शासन पंचायत ने पुलिस थाने के सामने कालादेव तिराहे पर लगभग 3 बीघा भूमि चिन्हित की थी। इसमें करीब 1 बीघा जमीन पर डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क और शेष 2 बीघा भूमि पर बस स्टैंड विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव को स्वीकृति भी मिली, लेकिन इसके बाद विकास कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। उसी दौरान यहां 12 दुकानों के निर्माण की योजना बनी, जिनमें से 3 दुकानें बनकर तैयार भी हो गईं थीं, परंतु आज वे जर्जर हालत में हैं और कभी भी गिर सकती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की नजर में यह स्थान विवादित बताया जाता रहा है। करीब 4–5 वर्ष पूर्व जोगी परिवार द्वारा नवरात्रि के दौरान यहां दुर्गा माता की झांकी लगाई गई थी। बाद में मूर्ति विसर्जन के बजाय मंदिर निर्माण का प्रयास किया गया, जबकि यह भूमि बस स्टैंड और अंबेडकर पार्क के लिए आरक्षित थी। इसी विवाद के चलते बस स्टैंड का निर्माण लगातार अटका रहा।

इतने बड़े ग्राम और आसपास के ग्रामीण अंचल के केंद्र होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों द्वारा इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। आनंदपुर वही क्षेत्र है, जहां से लक्ष्मीकांत शर्मा दो बार विधायक और दो बार कैबिनेट मंत्री रहे, लेकिन करीब 20 वर्षों के राजनीतिक प्रभाव के बाद भी बस स्टैंड जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद 5 वर्ष तक विधायक रहे गोवर्धनलाल उपाध्याय ने भी केवल आश्वासन दिए, ठोस पहल नहीं हुई। वर्तमान विधायक उमाकांत शर्मा ने मार्च माह में चुनाव आचार संहिता हटने के बाद ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन अब तक बस स्टैंड निर्माण की दिशा में कोई स्पष्ट शुरुआत नजर नहीं आ रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन अब समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

युवाओं के संघर्ष से मिली थी बस स्टैंड
कम लोग जानते हैं कि यह बस स्टैंड की जमीन युवाओं के संघर्ष से हासिल हुई थी। वर्ष 1999–2000 में ‘वंदे मातरम युवा संगठन’ के बैनर तले युवाओं ने 14 सूत्रीय मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी। इस आंदोलन में मनोज भार्गव, रामबाबू वाघेला, अमित शर्मा, वल्लभ शर्मा, प्रकाश शर्मा सहित दर्जनों युवा शामिल थे। युवाओं ने साफ चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे भूखे मर जाएंगे, लेकिन आंदोलन स्थल नहीं छोड़ेंगे। तब जाकर प्रशासन ने बस स्टैंड के लिए यह स्थान उपलब्ध कराया और करीब एक माह तक यहां बसों का ठहराव भी शुरू हुआ, लेकिन आगे विकास कार्य ठंडे बस्ते में चला गया।
आज स्थिति यह है कि सुव्यवस्थित बस स्टैंड नहीं होने के कारण बसें मनमर्जी से सड़क किनारे रुकती हैं। यात्रियों को दौड़कर बस पकड़नी पड़ती है, जिससे दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है। कई बार जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है, जिससे अन्य वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बढ़ रहा हैं अतिक्रमण
बस स्टैंड के लिए चिन्हित भूमि पर लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। गुमटियां लग चुकी हैं और कुछ लोगों ने तो पक्के निर्माण भी कर लिए हैं। अब मुश्किल से डेढ़ बीघा जमीन ही बची है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में अंबेडकर पार्क और बस स्टैंड के लिए एक फीट जमीन भी नहीं बचेगी।
इसके साथ ही क्षेत्र में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। गुमटियों के पीछे बाजार का कचरा फेंका जा रहा है। न ग्राम पंचायत इस पर सख्ती दिखा रही है और न ही प्रशासन, जिससे स्वच्छ भारत अभियान की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है।
इनका कहना है
पूर्व सरपंच प्रेम सिंह बघेल का कहना है कि अपने छह माह के कार्यकाल में उन्होंने ग्राम की प्रमुख समस्याओं को हल करने का प्रयास किया और बस स्टैंड की स्वीकृति भी उसी दौरान मिली थी।
इस संबंध में श्रीबल्लभ शर्मा ने बताया कि बड़ी मुश्किल से बस स्टैंड की जगह स्वीकृत कराई गई थी लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण बस स्टैंड नहीं बन सकी, इतने बड़े गांव में बस स्टैंड ना होना आनंदपुर के लिए बहुत ही गंभीर बात हैं
अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि कब जागते हैं और आनंदपुर के नागरिकों को कब एक सुरक्षित व सुव्यवस्थित बस स्टैंड नसीब होता है।



