विदिशामध्यप्रदेश

माता रमाबाई अंबेडकर की जयंती पर जीवन संघर्ष को किया नमन

आनंदपुर डेस्क :

आनंदपुर के अंतर्गत ग्राम कालादेव स्थित अंबेडकर पार्क में भारतीय संविधान निर्माता बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवन संगिनी, त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति माता रमाबाई अंबेडकर जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अनुयायी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत माता रमाबाई अंबेडकर जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर वक्ताओं में कुमारी रीमा बौद्ध एवं हरिशंकर ए ने माता रमाबाई के जीवन संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि माता रमाबाई का जीवन त्याग, सहनशीलता और संघर्ष की जीवंत मिसाल है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में डॉ. अंबेडकर का हर परिस्थिति में साथ निभाया और सामाजिक परिवर्तन के महान लक्ष्य के लिए असंख्य कष्ट सहन किए।

रीमा बौद्ध ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब बाबा साहेब शिक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे, उस समय माता रमाबाई ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ गरीबी, बीमारी और सामाजिक उपेक्षा का सामना करते हुए अद्भुत धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि माता रमाबाई का योगदान भले ही इतिहास में कम लिखा गया हो, लेकिन बाबा साहेब के संघर्ष की मजबूत नींव वही थीं।

हरिशंकर बौद्ध ने कहा कि माता रमाबाई केवल एक पत्नी नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति की मौन साधिका थीं। उनके त्याग और संघर्ष से हमें नारी सम्मान, समानता और आत्मबल की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक समरसता, शिक्षा और संविधानिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
अंत में सभी ने माता रमाबाई अंबेडकर जी के विचारों और त्याग को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए जयंती कार्यक्रम का समापन किया।

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