विदिशा

आचार्य श्री को विनयांजलि: युगों युगों के बाद धरा पर ऐसे मोती भी आते हैं। त्याग तपस्या के मार्ग पर चलकर कोई विद्यासागर भी बन जाते हैं

आनंदपुर डेस्क :

ब्रह्मलीन जैनाचार्य 108 श्री विद्यासागर महाराज की स्मृति में सामाजिक संगठन जन चेतनामंच द्वारा आनंदपुर में विन्यांजली सभा का आयोजन किया गया। जिसमे अनेक संगठन और गणमान्य नागरिकों द्वारा आचार्य श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बनियांजलि सभा को संबोधित करते हुए भक्तों ने कहा कि आचार्य श्री के ऊपर कुछ बोलना जैसे सूर्य को दीपक दिखाने जैसा है आचार्य श्री सिर्फ एक जैन समुदाय विशेष के नहीं थे बल्कि वह इस राष्ट्र की एक धरोहर थे वह भले ही हमारे साथ नहीं है लेकिन उनके विचार हमेशा हम सभी का मार्गदर्शन करते रहेंगे आचार्य श्री के बताए हुए मार्ग पर चलना बहुत ही आसान है जैसे आचार्य श्री कहते थे की व्यक्ति को सदा शाकाहार रहना चाहिए।

शाकाहार में खाने के लिए इतना कुछ है कि हम प्रतिदिन एक एक ही वस्तु का उपयोग करें तो भी पूरी जिंदगी में नहीं खा पाएंगे पश्चिमी देशों की तो एक मजबूरी है कि उनके यहां खाने की कमी है इसलिए वह मांसाहार का उपयोग करते हैं लेकिन हमारे यहां खाने के लिए किसी भी चीज की कमी नहीं है। साथ ही वक्ताओं ने आचार्य श्री के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अविश्वसनीय घटनाओं का जिक्र भी किया

नशा मुक्ति और मांसाहार का किया त्याग – विनयांजलि सभा के दौरान जन चेतना मंच के संरक्षक सूरज सिंह अहिरवार ने शराब और मांस का अपने जीवन में दोबारा कभी उपयोग नहीं करने का संकल्प लिया और कहा कि यदि मैं आचार्य श्री को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूं तो आज से ही मांसाहार और शराब का सेवन नहीं करूंगा। जैसे ही सूरज सिंह अहिरवार ने यह संकल्प दोहराया तो श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों ने करतल धोनी से उनका स्वागत किया और कहा कि आज सूरज सिंह जी ने वाकई आचार्य श्री को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है।


विनयांजलि सभा को लगभग एक दर्जन से अधिक वक्ताओं ने संबोधित किया और श्रद्धांजलि सभा के अंत में आचार्य श्री की महा आरती की गई इस अवसर पर लगभग 100 से अधिक नागरिक बंधु उपस्थित रहे।

आचार्य श्री की उल्टी पेंटिंग बनाई – क्षेत्र के प्रसिद्ध कवि और पेंटर कालूराम राव ने एक बोर्ड पर आचार्य की उल्टी पेंटिंग बनाकर सभी का दिल जीत लिया जब पेंटर पेंटिंग बना रहे थे तो सभी के मन में यह ख्याल आ रहा था कि आखिर यह पेंटर क्या बना रहे हैं जैसे ही पेंटिंग पूरी बनकर तैयार हुई और कालू पेंटर ने उस बोर्ड को उठाकर सीधा किया तो आचार्य श्री का छायाचित्र बनकर तैयार हो चुका था जिस पर उपस्थित सभी नागरिक बंधुओ ने कालू पेंटर का जोरदार तालियो से स्वागत किया इससे पहले कालू पेंटर ने आचार्य श्री पर चंद पंक्तियों की एक शानदार कविता भी सुनाई। कविता के बोल थे। युगों युगों के बाद धरा पर ऐसे मोती भी आते हैं। त्याग तपस्या के मार्ग पर चलकर कोई विद्यासागर भी बन जाते हैं।

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