रायसेनमध्यप्रदेश

सांची महोत्सव 2025 में उमड़ी आस्था की अभूतपूर्व भीड़: ऐतिहासिक शोभायात्रा

धार्मिक अनुष्ठान और समाजसेवी संगठनों की सेवा बनी आकर्षण का केंद्र

रायसेन डेस्क :

विश्व धरोहर सूची में शामिल सांची स्तूप परिसर में आयोजित विरक्त भिक्षु संगी मोदक मेला 2025 इस वर्ष अद्भुत आस्था, संस्कृति और सेवा के भाव के साथ सम्पन्न हुआ। हजारों श्रद्धालु सांची पहुंचे और प्राचीन स्तूपों एवं पवित्र अवशेष कलशों के दर्शन कर क्षेत्र की शांति, सद्भावना और समृद्धि की कामना की। मेले में धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोभायात्रा का अद्भुत समन्वय देखने मिला, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जाओं से भर दिया।

इस वर्ष मेले की भव्य शोभायात्रा निर्धारित समय से 30 मिनट पहले प्रारंभ हुई, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर रहा। शोभायात्रा में बौद्ध भिक्षुओं का अनुशासित दल, पारंपरिक बौद्ध वाद्ययंत्र, रंग-बिरंगे छत्र, ध्वज, महिलाएँ–पुरुष एवं विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि शामिल रहे। आस्था से ओतप्रोत हजारों श्रद्धालु शोभायात्रा के मार्ग में खड़े होकर दीप, फूल एवं कलशों से स्वागत करते दिखे। शांत स्वर में गूंजते मंत्रोच्चार और ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ की धुन ने पूरे सांची परिसर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

यात्रा लगभग 35 मिनट में कल्याणगिरि विहार पहुँचकर संपन्न हुई। वहाँ भिक्षुओं द्वारा प्रार्थना, ध्यान और शांति पाठ का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी शांति और अनुशासन के साथ दर्शन किए। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और व्यवस्था के बेहतर प्रबंध किए थे, जिससे भीड़ नियंत्रण में सहूलियत रही।

मेले के दौरान समाजसेवी संस्थाओं का सेवा भाव भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना। विशेषकर अहिरवार समाज संघ भारत ने भोजन दान और वस्त्र वितरण कर मानवता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। संघ के सैकड़ों स्वयंसेवक भोजन वितरण केंद्रों पर पूरे दिन मौजूद रहे और हजारों श्रद्धालुओं को भोजन, जल और फलाहार उपलब्ध कराया। संघ ने महिलाओं, वृद्धों एवं दूरदराज से आए भिक्षुओं को वस्त्र भी भेंट किए। स्वयंसेवकों के इस सेवा भाव ने मेले में आने वाले हर व्यक्ति को प्रभावित किया।

इसी प्रकार बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया तथा रविदास विश्व कल्याण समिति ने भी बड़े स्तर पर भंडारे संचालित किए। विभिन्न स्थानों पर लगे इन भंडारों में आने वाले हर श्रद्धालु को प्रेम और सम्मान के साथ भोजन परोसा गया। इन संस्थाओं ने न सिर्फ भोजन दान किया बल्कि सफाई, पानी वितरण और व्यवस्था संभालने में प्रशासन का सहयोग भी किया।

इस अवसर पर अहिरवार समाज संघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जगदीश सिंह सूर्यवंशी ने श्रद्धालुओं को सांची के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि सांची स्तूप केवल बौद्ध धर्म का प्रतीक नहीं, बल्कि यह समस्त मानवता के लिए करुणा, अहिंसा और शांति का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक द्वारा निर्मित यह स्थल दुनिया भर में बौद्ध वास्तुकला, कला और इतिहास का अद्वितीय प्रमाण है। डॉ. सूर्यवंशी ने श्रद्धालुओं से सांची की विरासत को संरक्षण देने का आह्वान भी किया।

मेले में आई भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आज भी लोग धर्म, संस्कृति और सेवा की भावना से जुड़े आयोजनों के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। शोभायात्रा की अनुशासित व्यवस्था, सामाजिक संगठनों का योगदान और प्रशासन की तैयारी इस महोत्सव को सफल बनाने में महत्वपूर्ण रही।

सांची महोत्सव 2025 आस्था, शांति और करुणा का सुंदर संगम साबित हुआ। ऐतिहासिक धरोहरों के बीच सम्पन्न यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक महत्व लिए हुए था, बल्कि समाज में सेवा, सद्भाव और सहयोग का भी उत्कृष्ट संदेश देकर सम्पन्न हुआ।

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