वेदों के संग ध्यान का अभ्यास: संस्कृत गुरुकुल में हार्टफुलनेस संस्था का तीन दिवसीय सत्र सम्पन्न

आनंदपुर डेस्क:
सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट, आनंदपुर द्वारा संचालित संस्कृत गुरुकुल विद्यालय बिड़ला मंदिर में हार्टफुलनेस संस्था के सहयोग से तीन दिवसीय ध्यान सत्रों का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन में विद्यार्थियों को न केवल ध्यान की वास्तविक अनुभूति कराई गई, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया गया कि कैसे ध्यान उनके बौद्धिक और मानसिक विकास का सशक्त माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को ध्यान की सरल तकनीकों से परिचित कराया। ध्यान अभ्यास के जरिए विद्यार्थियों में एकाग्रता, आत्मचिंतन, भावनात्मक स्थिरता और सकारात्मक सोच को विकसित करने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने यह भी बताया कि किस प्रकार नियमित ध्यान अभ्यास से विद्यार्थी तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं से मुक्त होकर एक निपुण, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

कार्यक्रम में विद्यालय प्राचार्य शिवकुमार त्रिपाठी, मंदिर ट्रस्टी रवि उपाध्याय और डॉ. सुरेंद्र उपाध्याय की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में जब बच्चों का मन अनेक प्रकार के भटकावों से घिरा होता है, ऐसे में ध्यान उन्हें आंतरिक शांति और आत्मानुशासन की दिशा में अग्रसर करने वाला सर्वोत्तम साधन है।
इस अवसर पर हार्टफुलनेस संस्था के क्षेत्रीय प्रभारी जीतू मीना ने जानकारी दी कि लटेरी क्षेत्र में सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट एवं हार्टफुलनेस संस्था मिलकर नशा मुक्ति और मानवीय मूल्यों के विकास की दिशा में सतत प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में जल्द ही “ब्राइटर माइंड” नामक विशेष सत्रों की शुरुआत की जाएगी, जो बच्चों के स्मरण शक्ति, तार्किक सोच और निर्णय क्षमता को एक नई दिशा प्रदान करेंगे।
इस समग्र प्रयास में सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट आनंदपुर के डायरेक्टर डॉ. विष्णु भाई जोबनपुत्रा एवं भारती बेन जोबनपुत्रा का निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो रहा है, जो न केवल इस पुनीत कार्य को समर्थन दे रहे हैं, बल्कि सभी को सकारात्मक समाज निर्माण की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
संस्कृत गुरुकुल में वेदों की पवित्र वाणी और ध्यान की शांत ऊर्जा के समागम ने विद्यार्थियों को आत्मिक बल प्रदान किया। इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक मनोविज्ञान का संतुलन साध लिया जाए, तो नई पीढ़ी को संस्कारित और सक्षम नागरिक के रूप में ढाला जा सकता है।



