BREAKING- ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में स्नान कर रहे श्रद्धालू फंसे: बांध से पानी छोड़े जाने पर चट्टानों में फंसे
न्यूज़ डेस्क :
ओंकारेश्वर बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नर्मदा नदी में नहा रहे 20 से ज्यादा श्रद्धालु फंस गए। सभी पानी बढ़ने और तेज बहाव देखकर घबरा गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे। किनारे पर मौजूद लोगों ने गोताखोरों को सूचना दी। इसके बाद बोट और रस्सियों की मदद से सभी को बाहर निकाला गया।
टीआई बलजीत सिंह बिसेन के मुताबिक, महाराष्ट्र के 14 युवा श्रद्धालु ओंकारेश्वर दर्शन करने आए थे। इनके अलावा कुछ और श्रद्धालु भी थे। सभी नर्मदा में चट्टानों पर जाकर स्नान कर रहे थे। बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नदी में बहाव तेज हो गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि श्रद्धालुओं के कदम डगमगाने लगे। वे चट्टानों के सहारे खड़े हो गए। इधर, पानी का लेवल भी बढ़ता जा रहा था।
श्रद्धालु अलग-अलग चट्टानों पर फंसे हुए थे। जिस वक्त हादसा हुआ, तब नदी में बोटिंग भी हो रही थी। गोताखोरों ने श्रद्धालुओं काे रस्सी पकड़ाई, इसके सहारे सभी को एक-एक कर किनारे पर लाया गया।
नाविकों का दावा, 40 से ज्यादा को रेस्क्यू किया
SDM चंदरसिंह सोलंकी के मुताबिक, ओंकारेश्वर विद्युत परियोजना के चार टरबाइन चल रहे थे। इन्हीं टरबाइन से नर्मदा में एक-एक घंटे के अंतराल से पहली बार सुबह 9 बजे पानी छोड़ा गया था। बांध प्रशासन ने टरबाइन से पानी छोड़ने के साथ सायरन भी बजाए, लेकिन बाहरी श्रद्धालु स्थानीय स्थिति से वाकिफ नहीं थे। 20 से ज्यादा श्रद्धालुओं को रेस्क्यू किया गया है। हालांकि, नाविकों ने 40 से ज्यादा श्रद्धालु के रेस्क्यू होने का दावा किया है।
पानी छोड़े जाने की सूचना दी, लेकिन नहीं माने
बांध प्रशासन ने पानी छोड़ने से पहले सायरन भी बजवाया था। इसके बाद पानी छोड़ा गया। इन युवाओं को स्थानीय लोगों ने आवाज देकर बाहर बुलाने की कोशिश भी की। बताया भी कि सायरन बज चुका है, अब पानी छोड़ दिया जाएगा, लेकिन वे नहीं माने और नहाते रहे। जब नदी में अचानक पानी बढ़ा तो सभी बचाने की गुहार लगाने लगे। नाविकों ने उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाला। सभी सुरक्षित हैं।
महाकाल लोक से ओंकारेश्वर भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
उज्जैन में महाकाल लोक बन जाने के कारण रोजाना भारी संख्या में वहां श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यही श्रद्धालु ओंकारेश्वर भी दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। इन दिनों नदी में पानी कम है। ऐसे में श्रद्धालु नदी के बीच चट्टानों पर जाकर बैठ जाते हैं। बांध से कभी भी पानी छोड़ दिया जाता है।



