350 साल पुरानी हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब अब डिजिटल दुनिया में: बासौदा की अमूल्य धरोहर ज्ञान भारतम मिशन से जुड़ी

विदिशा डेस्क :
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। विदिशा जिले के बासौदा नगर में संरक्षित लगभग 350 वर्ष पुरानी हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब को केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम मिशन से जोड़ते हुए उसका डिजिटलीकरण कर ज्ञान भारतम ऐप पर अपलोड किया गया है। यह दुर्लभ ग्रंथ बासौदा के सदर बाजार स्थित कपूर परिवार की पीढ़ियों से सुरक्षित अमूल्य धरोहर है।
कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देशन एवं एसडीएम अनुभा जैन के मार्गदर्शन में किए गए इस कार्य ने जिले को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। लगभग 750 पृष्ठों वाला यह पवित्र ग्रंथ गुरुमुखी भाषा में हस्तलिखित है और धार्मिक, ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

कपूर परिवार के अनुसार भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान उनके पूर्वज इस पवित्र ग्रंथ को पाकिस्तान से अपने साथ भारत लेकर आए थे। तब से कई पीढ़ियों से इसे श्रद्धा, सम्मान और विशेष सावधानी के साथ संरक्षित किया जा रहा है। आज भी यह दुर्लभ धरोहर अपनी मूल अवस्था में सुरक्षित है, जो तत्कालीन लेखन कला, धार्मिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत का जीवंत प्रमाण है।
ज्ञान भारतम मिशन के तहत डिजिटलीकरण होने से अब यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रहने के साथ-साथ शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और भावी पीढ़ियों के अध्ययन के लिए भी उपलब्ध हो सकेगी। प्रशासन जिले में निजी एवं सार्वजनिक संग्रहों में संरक्षित अन्य दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान कर उन्हें भी इस मिशन से जोड़ने का कार्य कर रहा है। बासौदा के कपूर परिवार की यह पहल भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी और ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।



