शक्कर के भाव बढ़े तो कार्टून में छलका महंगाई का दर्द

आनंदपुर डेस्क :- सीताराम वाघेला
सप्ताह शक्कर के बढ़े दामों ने जहां आम आदमी के घरेलू बजट का जायका बिगाड़ा, वहीं क्षेत्र के प्रसिद्ध कवि एवं पेंटर कालूराम राव ने अपने खास अंदाज में बढ़ती महंगाई पर करारा व्यंग्य किया है। राव ने शक्कर के बढ़ते भाव को केंद्र में रखकर ऐसा कार्टून बनाया है, जिसमें राजनीति, महंगाई और आम आदमी की परेशानी को हास्य के साथ जोड़ा गया है। कार्टून इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
कार्टून में एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यंग्यात्मक चित्रण करते हुए जनता की ओर से शक्कर के बढ़ते भाव पर सवाल उठाया गया है, वहीं दूसरी ओर शुगर के मरीज को मीठी बातों से भी सावधान रहने की सलाह दी गई है। संवादों के जरिए राव ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जब रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ते हैं तो उसका असर केवल जेब पर नहीं, बल्कि आम आदमी के मूड और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देता है।
राव के इस कार्टून की खासियत यह है कि उन्होंने गंभीर आर्थिक चिंता को हास्य और तंज की चाशनी में लपेटकर पेश किया है। शक्कर के भाव बढ़ने को लेकर जनता की बेचैनी को उन्होंने सीधे राजनीतिक सवाल से जोड़ते हुए महंगाई के मुद्दे को सहज, लेकिन चुभते अंदाज में सामने रखा है।
कार्टून के माध्यम से राव का संदेश साफ है कि महंगाई चाहे किसी भी चीज की हो, उसका सबसे पहला असर आम परिवार की रसोई पर पड़ता है। ऐसे में सावन के इस मौसम में जब त्योहारों और मिठास का माहौल है, तब “सावन की मिठास कम नहीं होनी चाहिए” का संदेश भी कार्टून के व्यंग्य को एक सकारात्मक रंग देता है।
कालूराम राव अपने कार्टून के जरिए एक बार फिर यह बताने में सफल रहे हैं कि जब महंगाई के आंकड़े आम आदमी को परेशान करने लगें, तो व्यंग्यकार की कलम और पेंटर की कूची भी सवाल पूछने लगती है।



