विदिशा
*एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट* 10 किमी दूर बैंक, हजारों लोग परेशान: आनंदपुर में राष्ट्रीयकृत बैंक की मांग तेज, संगठनों ने आंदोलन की दी चेतावनी

आनंदपुर डेस्क : सीताराम वाघेला
विदिशा|जिले के अंतिम छोर पर बसे आनंदपुर नगर में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा नहीं होने से नगर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए 5 से 10 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है। किसान, व्यापारी, पेंशनधारी, छात्र-छात्राएं और शासन की विभिन्न योजनाओं के हितग्राही बैंक संबंधी कार्यों के लिए सदगुरु नगर और लटेरी जाने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि आनंदपुर जैसे बड़े बाजार और उपमंडी क्षेत्र में बैंक का अभाव विकास और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डाल रहा है।
आनंदपुर क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक एवं कृषि केंद्र है। यहां विदिशा के साथ-साथ गुना और अशोकनगर जिले के किसान भी अपनी उपज बेचने पहुंचते हैं। बावजूद इसके नगर में किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा नहीं है। लोगों का कहना है कि बैंकिंग सुविधा के लिए हर बार अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ता है।

2014 में शिफ्ट हुई शाखा, तब से बढ़ी परेशानी
सेवानिवृत्त प्राचार्य मुकुट बिहारी श्रीवास्तव ने बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा वर्ष 1981 में आनंदपुर में शुरू हुई थी। वर्ष 2014 में इसे नगर से करीब चार/पांच किलोमीटर दूर सदगुरु नगर स्थित सदगुरु सेवा संघ परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। उस समय भी नागरिकों और खाताधारकों ने विरोध किया था, लेकिन शाखा को शिफ्ट कर दिया गया।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बैंक के दूर चले जाने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कियोस्क सेंटर संचालित होने के बावजूद लेन-देन की सीमित व्यवस्था होने से बड़े बैंकिंग कार्यों के लिए शाखा तक जाना ही पड़ता है।
मंडी, व्यापार और किसानों पर पड़ रहा असर
गल्ला व्यापारी दीपक जैन ने बताया कि आनंदपुर उपमंडी में बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने आते हैं। किसानों को भुगतान के लिए बैंक से नकदी लाने में काफी समय लगता है। कई बार एक कार्य के लिए दो से तीन बार बैंक जाना पड़ता है।

व्यापारी मनीष साहू के अनुसार मंडी में फसलों की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन बैंक सुविधा नहीं होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। किसानों और व्यापारियों दोनों को समय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि केसीसी, ऋण, खाते और अन्य बैंकिंग कार्यों के लिए इसी एक शाखा पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार सर्वर डाउन, नेटवर्क समस्या और नकदी की कमी के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है।
संगठन बोले- बैंक नहीं आया तो होगा आंदोलन
सरपंच संघ लटेरी के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं की राशि खातों में आने के बाद भी हितग्राहियों को उसे निकालने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांगजन सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
पेट्रोल पंप संचालक रामू रघुवंशी और किशन सिंह बघेल ने बताया कि नकदी जमा करने के लिए नियमित रूप से दूर जाना पड़ता है। रास्ता सुनसान होने के कारण सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बना रहता है। उनका कहना है कि जब बैंक का नाम आनंदपुर शाखा है तो उसका संचालन भी आनंदपुर में होना चाहिए।
जन चेतना मंच, अहिरवार समाज संघ भारत, चौरसिया समाज संघ, सर्व सेन समाज तथा व्यापार महासंघ सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा को पुनः आनंदपुर में स्थापित किया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो एसबीआई या किसी अन्य राष्ट्रीयकृत बैंक की नई शाखा खोली जाए। संगठनों ने चेतावनी दी है कि ज्ञापन के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
विधायक ने दिया आश्वासन
इस संबंध में सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि वे पहले भी पत्र लिख कर इस विषय को संबंधित विभागों के समक्ष उठा चुके हैं और पुनः मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों तथा प्रधानमंत्री स्तर पर पत्र लिखकर आनंदपुर में बैंक शाखा स्थापित कराने का प्रयास करेंगे।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि आनंदपुर जैसे बड़े बाजार और उपमंडी क्षेत्र में राष्ट्रीयकृत बैंक की स्थापना केवल सुविधा नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास की आवश्यकता बन चुकी है।



