मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश सरकार के खजाने का दम फूला: लाड़ली बहना व अन्य योजनाओं के लिए 3 माह में सरकार लेगी 25000 करोड़ का कर्ज

भोपाल डेस्क :                                   सीताराम वाघेला 

चुनावी साल में हुई घोषणाओं को पूरा करने के लिए मप्र सरकार को अगले तीन महीने में 25 हजार करोड़ रुपए कर्ज लेना पड़ेगा। इससे लाड़ली बहना के 4200 करोड़ और संविदा कर्मियों के बढ़ाए गए मानदेय को देने के लिए 1500 से 2000 करोड़ रुपए के साथ अन्य स्कीमों को पूरा करने पर लगने वाली राशि की भरपाई होगी।

राज्य सरकार के पर जो पुराने लोन चल रहे हैं, उसका मूलधन भी नए कर्ज से जमा कराया जाएगा। साफ है कि इतना लोन लेने के बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 के खत्म होते-होते तक मप्र पर लगभग 4.30 लाख करोड़ रुपए तक का कर्ज होगा।

खजाने को देखते हुए नई सरकार के गठन से लेकर हर दूसरे दिन वित्त विभाग को रिव्यू करना पड़ रहा है। हाल ही में विभाग ने एक सर्कुलर भी जारी कर दिया, जिसमें प्रमुख योजनाओं पर कटौती की तलवार लटका दी है। साथ ही कह दिया है कि बिना उनकी मंजूरी के खजाने से पैसा जारी न किया जाए। इन स्कीमों में महाकाल परिसर का विकास और मेट्रो ट्रेन जैसी स्कीमें भी शामिल हैं। सहकारी बैंकों को अंश पूंजी, तीर्थ यात्रा योजना, खेलो इंडिया मप्र, एफ टाइप और उससे नीचे के सरकारी मकानों की रखरखाव, आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की फीस, डॉ. टंट्या भील मंदिर जीर्णोद्धार जैसे काम भी शामिल हैं। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि 2024-25 के लेखानुदान से पहले एक अनुपूरक लाने पर कवायद चल रही है, लेकिन अब तक सहमति नहीं बनी है।

योजनाओं पर कटौती की तलवार
महाकाल परिसर, मेट्रो ट्रेन जैसी कई योजनाओं का काम हो सकता है प्रभावित
वित्त की मंजूरी बिना खजाने से कोई भी राशि जारी करने पर रोक

इन योजनाओं से फूल रहा दम
स्कूटी : पहले सिर्फ लड़कियों को देना था। तब 75 करोड़ लगते, लेकिन चुनाव में लड़कों को भी देने की घोषणा कर दी गई, लिहाजा अब 200 करोड़ रुपए लगेंगे।
संविदा कर्मी : इनका वेतनमान बढ़ा दिया गया है। इसपर अब 2000 करोड़ रुपए भार आ रहा है। उन्हें लैपटॉप देने की भी घोषणा की गई।
पुलिस : वर्दी, भोजन और पेट्रोल समेत कई भत्ते बढ़ा दिए गए हैं। पेट्रोल पर ही हर माह एक पुलिसकर्मी पर 1500-2000 रुपए खर्च हो रहा है।
गैस सिलेंडर : लाड़ली बहना को 450 रुपए में सिलेंडर देने पर हर माह 80-90 करोड़ चाहिए। बचे 3 माह के लिए 300 करोड़ की जरूरत है। पहले इसे एक सावन मास के लिए रखा गया था, अब ऐसा नहीं है।
पंचायत : सभी श्रेणियों में वेतन बढ़ा दिया गया। ग्रांट में जो राशि जारी होती थी, उसे वेतन मद में डाल दिया गया है। दरअसल, मप्र में 23 हजार रोजगार सहायकों का वेतन दोगुना हो गया है।
शिक्षा : कॉलेज के अतिथि विद्वानों का मानदेय 20 हजार रुपए बढ़ाया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय भी बढ़ाया गया।

अब तक 40 हजार करोड़ कर्ज ले चुके… जनवरी 2023 से अभी तक राज्य सरकार करीब 40 हजार करोड़ कर्ज ले चुकी है। एक बार में सर्वाधिक कर्ज 4000 करोड़ लिया गया है। आरबीआई के ऑक्शन के जरिए यह कर्ज उठाया गया है।

फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एक्ट का पालन अनिवार्य – भास्कर एक्सपर्ट – केएस शर्मा, पूर्व चीफ सेक्रेटरी
एक पुरानी कहावत है, उतना पैर पसारिए जैसी चादर हो। इस हिसाब से प्रदेश सरकार को इंफ्रा और वेलफेयर एक्टिविटी जरूरी है लेकिन इसमें फ्रीबीज को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए अनप्रोडक्टिव खर्च खत्म किया जाना चाहिए। इवेंट मैनेजमेंट और उत्सव मनाने पर ज्यादा खर्च किया जाता है।

इसी तरह अन्य ऐसे कार्य, जिससे सरकार को कोई फायदा नहीं हो रहा उससे बचना चाहिए। बैंक में भी कोई कर्ज लेते हैं तो एसेसमेंट होता है कि इसे वापस करने की कैपेसिटी है या नहीं। इसी तरह सरकार को भी ऑडिट करना चाहिए। फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एक्ट का पालन मप्र में नहीं किया जा रहा है। इससे साबित हो रहा है कि सरकार वित्तीय प्रबंधन में लापरवाही कर रही है। इस परिस्थिति में नागरिकों को इसे स्थानीय निर्वाचनों में एक मुद्दा बनाने का प्रयास करना चाहिए।

खर्च तो कम नहीं हो सकता, आय के लिए नई प्लानिंग करना होगा
स्थापना व्यय तो कम हो नहीं सकता है, ऐसे में सरकार के पास विकास कार्यों के लिए अधिक राशि की व्यवस्था करने का एक ही रास्ता है कि स्वयं की आय बढ़ाई जाए। सरकार को इंटरनल और एक्टर्नल एजेंसियों से प्लानिंग और रिसर्च कराना चाहिए। इससे कस्टमर बिहेवियर का पता चल सकेगा। वहीं ग्राउंड रियालिटी के आधार पर नई प्लानिंग करना चाहिए। बिजली कंपनियों का भुगतान भी इस कर्ज का एक बड़ा कारण है। बिजली कंपनियों को आय के स्रोत और क्लाइंट बेस बढ़ाने की जरूरत है। -प्रो. प्रशांत सल्वान, स्ट्रेटेजी एंड इंटरनेशनल बिजनेस, IIM इंदौर

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