विदिशा

पतझड़ में भी खिला आनंदपुर: पलाश-सेमर के संग ‘हैंड्रोएंथस’ के पीले फूलों ने बिखेरी अनोखी छटा

आनंदपुर डेस्क :                                सीताराम वाघेला 

पतझड़ का मौसम जहां आमतौर पर पेड़ों से झड़ते सूखे पत्तों के लिए जाना जाता है, वहीं आनंदपुर में इन दिनों प्रकृति का एक अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। अधिकतर पेड़ भले ही पत्तों से खाली नजर आ रहे हों, लेकिन कुछ पेड़ों पर खिले फूल पूरे वातावरण को रंगीन और मनमोहक बना रहे हैं। खासतौर पर पलाश और सेमर के पेड़ अपने सिंदूरी फूलों से गांव की फिजा को आकर्षक बना रहे हैं।

इसी बीच एक दुर्लभ और विदेशी प्रजाति का पेड़ ‘हैंड्रोएंथस अल्बस’ इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह पेड़ आनंदपुर के सद्गुरु सेवा संघ के सद्गुरु संकल्प नेत्र चिकित्सालय के सामने स्थित गार्डन में खड़ा है, जो इन दिनों पीले फूलों से लदा हुआ है। गुलदस्ते जैसे गुच्छों में खिले इसके चमकीले पीले फूल इसकी सुंदरता को और भी बढ़ा रहे हैं।

इस पेड़ की खास बात यह है कि मार्च के महीने में इसमें फूल आते हैं, वह भी तब जब इस पर एक भी पत्ता नहीं होता। पूरी तरह फूलों से ढका यह पेड़ दूर से ही अपनी अलग पहचान बना लेता है। जैसे ही फूल झड़ते हैं, कुछ ही दिनों में नई पत्तियां आना शुरू हो जाती हैं।

स्थानीय लोगों के लिए यह पेड़ किसी आकर्षण से कम नहीं है। हॉस्पिटल आने वाले ओर राह चलते लोग यहां रुककर इसकी सुंदरता को निहारते हैं और फोटो भी खींचते नजर आते हैं। सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के जनरल सुपरवाइजर राम अवतार शर्मा ने बताया कि इस पेड़ का इतिहास भी खास है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी एवं पूर्व विधायक गोवर्धन लाल उपाध्याय उज्जैन से इस पौधे को लाकर यहां लगाया था।

आज यह पेड़ हर साल इसी मौसम में अपने फूलों की बहार से लोगों का मन मोह लेता है और आनंदपुर की पहचान बनता जा रहा है। पतझड़ के बीच इस तरह का रंगीन नजारा प्रकृति के अनोखे सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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