मध्यप्रदेश

पूर्व सीएम शिवराज के खिलाफ जारी हुआ वारंट: बीजेपी के ये नेता भी आए घेरे में

न्यूज़ डेस्क :

कोर्ट ने शिवराज के साथ ही BJP प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ भी जमानती वारंट जारी किया है. वारंट में MP-MLA कोर्ट ने सभी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति होने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को 7 मई को पेश होने का आदेश दिया है।

शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) पहले 2023 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में जीतने के बाद भी सत्ता से शिखर पर पहुंचने से महरूम रह गए. अब Jabalpur Court news: पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव (LOKSabha Election) के लिए मध्य प्रदेश के विदिशा से टिकट देकर मैदान में उतारा है. लेकिन, इस बीच  शिवराज नई मुसीबत में फंसते नजर आ रहे हैं. दरअसल, जबलपुर की MP-MLA कोर्ट ने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की मानहानि के एक मामले में उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है. ये आदेश विशेष न्यायाधीश विश्वेश्वरी मिश्रा की कोर्ट ने जारी किया है.

कोर्ट ने शिवराज के साथ ही BJP प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ भी जमानती वारंट जारी किया है. वारंट में MP-MLA कोर्ट ने  सभी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति होने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को 7 मई को पेश होने का आदेश दिया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हाज़िरी माफी के लिए नेताओं की ओर से अंडरटेकिंग नहीं देने को भी कोर्ट का अपमान करार दिया. इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान के वकील की ओर से दिए गए 7 जून को उपस्थिति के आवेदन को कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया. इसके साथ ही इन नेताओं को गैरजिम्मेदार रवैया अपनाने के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं से कोर्ट के प्रति सम्मान दिखाने की ज्यादा अपेक्षा होती है. MP MLA कोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की है।

गौरतलब है कि इस वक्त ये सभी नेता लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार में जुटे हैं. शिवराज सिंह चौहान विदिशा सीट से उम्मीदवार है. लिहाजा, वह अपने चुनाव क्षेत्र में जनसंपर्क और चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं. वहीं, वीडी शर्मा खजुराहो सीट से भाजपा के प्रत्याशी हैं. इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष होने की वजह से पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी भी उनके कंधे पर हैं. ऐसे में इन नेताओं को कोर्ट की ओर से व्यक्तिगत रूप से से उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी होना, किसी सजा से कम नहीं है।

ये है मामला

मामला कुछ इस तरह है कि सुप्रीम कोर्ट में पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण को रद्द किए जाने के आदेश के बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस नेता व वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा को ओबीसी विरोधी नेता बताया था. दरअसल, साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी थी. इस दौरान विवेक तन्खा ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पंचायत और निकाय चुनाव में रोटेशन और परिसीमन को लेकर पैरवी की थी. उस वक्त बीजेपी नेताओं ने विवेक तन्खा को ओबीसी विरोधी बताते हुए उनके खिलाफ बयानबाजी की थी. सोशल मीडिया के साथ ही न्यूज चैनलों में भी बयानबाजी की गई थी और इसके बाद विवेक तन्खा ने भी अपनी सफाई देते हुए बयान जारी किया था. इसके साथ ही उन्होंने मानहानि करने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और तत्कालीन मंत्री भूपेन्द्र सिंह से सार्वजनिक माफी मांगने की बात कही थी, लेकिन तीनों नेताओं ने माफी नहीं मांगी, जिसके बाद विवेक तन्खा कोर्ट में उनके खिलाफ 10 करोड़ रुपए का मानहानि केस दायर किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए अब जबलपुर की एमपी एमएलए कोर्ट ने ये आदेश दिया है.

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