भोपाल

विज्ञान फिल्म फेस्टीवल हर संभाग में होगा, धर्म-संस्कृति और विज्ञान का समन्वय जरूरी – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सखलेचा

भोपाल डेस्क :

भारत को आत्म-निर्भर और विश्वगुरू बनाने विज्ञान को जन- जन तक ले जाने के लिए आगामी एक वर्ष में विज्ञान फिल्मों का प्रदर्शन मध्यप्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में उत्सव के रूप में किया जाएगा । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने  12 वें नेशनल साइंस फिल्म फेस्टीवल ऑफ इंडिया का उद्घाटन करने के बाद यह घोषणा की । मंत्री श्री सखलेचा ने मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के प्रो. जगदीशचंद्र बसु सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर 26 अगस्त तक चलने वाले इस उत्सव का शुभारंभ किया। 

ज्यूरी के अध्यक्ष सिद्धार्थ काक, परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति के जी सुरेश, फिल्म अभिनेता राजीव वर्मा, चयन सिमिति के शभूनाथ सिंह, विज्ञान प्रसार के निमिष कपूर भी उपस्थित थे । 

मंत्री सखलेचा ने कहा कि दुनिया को सबसे पहले विज्ञान भारत ने ही दिया, लेकिन गुलामी के चलते देश की विज्ञान धरोहर को विकसित नहीं किया जा सका । उन्होंने कहा कि विज्ञान फिल्म महोत्सव, भारत के विज्ञान को जन -जन तक पहुंचाने का सशक्त जरिया है । उन्होंने वैज्ञानिकों और युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के विपुल ज्ञान-विज्ञान-धर्म और संस्कृति को प्रसारित करने के लिए आगे आएं । उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह के प्रयासों के लिए भरपूर सहयोग भी करेगी । 

मंत्री ने कहा कि गांव- गांव तक विज्ञान और तकनीकी पहुंचाने की जरूरत है । उन्होंने कहा कि जब तक  आमजन  जीवन में विज्ञान की सार्थकता से परिचित नहीं हो जाता तब तक इस तरह के अभियान चलाए जाएं । उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति का विज्ञान के साथ सुसंगत समन्वय ही भारत को विश्व गुरू बना सकता  है । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने विज्ञान परिषद के निदेशक से कहा कि वे प्रयास करें, जिससे अगले एक साल में संभाग और दो साल में जिला स्तर पर विज्ञान फिल्म फेस्टीवल किए जा सकें । 

विज्ञान फिल्मोत्सव का  शुभारंभ महान भारतीय वैज्ञानिक पी.सी. रे पर केंद्रित डॉक्यूमेंटरी  के प्रदर्शन के साथ हुआ। विज्ञान भारती और संस्कृति मंत्रालय द्वारा बनाई गई यह फिल्म  आधुनिक रसायन शास्त्र के पितृ पुरूष प्रफुल्ल चन्द्र रे, स्वाधीनता के पहले शिक्षा जगत, रोजगार, गरीबी उन्मूलन और भारत में रासानिक उद्योग के विकास में असाधारण योगदान पर केंद्रित थी। 

ओशन‘ (महासागर) पर प्रदर्शित दूसरी डॉक्यूमेंटरी में महासागरों की अदभुत जैव विविधता पर मंडराते खतरों और उसे बचाने पर जोर दिया गया है। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि समाज और विज्ञान से जुड़े मुददों पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विकास और विज्ञान के समन्वय से प्रदेश को आगे बढ़ाया जा सकता है।

फिल्म अवार्ड ज्यूरी के चेयरमेन और लोकप्रिय ‘सुरभि’ कार्यक्रम से जुड़े रहे सिद्धार्थ काक ने कहा कि साइंटिफिक टेम्परामेंट को बढ़ावा देते हुए संक्षिप्त और प्रभावी कम्युनिकेशन की जरूरत है। 

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि. के कुलपति प्रो.के.जी.सुरेश ने कहा कि विज्ञान हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आबादी के कम शिक्षित  लोगों को अंधविश्वास से मुक्त करने के लिए उन्हें वैज्ञानिक कारणो और जलवायु बदलाव के मंडराते खतरों के बारे में बताने की जरूरत है। परिषद के महानिदेशक डॉ.अनिल कोठारी ने स्वागत उदबोधन में कहा कि विज्ञान के विभिन्न आयामों को लोकप्रिय बनाना है। विज्ञान फिल्मों के निर्माण और प्रदर्शन से देश के विज्ञान फिल्मकारों से लेकर विद्यार्थियों को अपनी मौलिक प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। उदघाटन सत्र में विज्ञान प्रसार के श्री निमिष कपूर ने कहा कि फिल्म उत्सव में केवल फिल्मों का प्रदर्शन ही नहीं, बौद्धिक चर्चा भी की गई है।

मंगलवार को रवीन्द्र भवन में प्रदर्शन

 दूसरे दिन के कार्यक्रम रवीन्द्र भवन में होंगे। प्रतियोगी श्रेणी की फिल्मों का हिन्दी और अंग्रेजी में प्रदर्शन किया जायेगा। इनमें कोरोना रोबोटस 2020,आर्ट मीट साइंस,लाइफ इन बॉटल आदि का प्रदर्शन किया जायेगा।

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