
आनंदपुर डेस्क :
आज अगर रमाबाई अंबेडकर ना होती तो भीमराव अंबेडकर भी बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ना होते। बाबा साहब की जो सफलता है इसके पीछे ओर कोई नहीं रमाबाई अंबेडकर का त्याग और बलिदान हैं। जब बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई कर रहे थे तब माता रमाबाई अंबेडकर मुंबई की गलियों में गोबर के उपले ( कंडे )बेचकर उन्हें पढ़ाई के लिए पैसे भेजती थी उन्होंने अपनी और अपने बच्चों की परवाह न करते हुए बाबा साहेब का कदम-कदम पर साथ दिया जिससे कि इस देश का पीड़ित शोषण शोषण बहुजन समाज को बराबरी का हक अधिकार दिला सके।

हमने अक्सर सुना और देखा है कि एक सफल पुरुष के पीछे स्त्री का हाथ होता है लेकिन हमने शायद ही कहीं सुना हो कि एक सफल स्त्री के पीछे पुरुष का भी हाथ होता है ऐसी इस देश की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले थी जिनकी बदौलत आज देश में महिलाओं को पढ़ने लिखने का अधिकार मिला है। ऐसी ही और अनगिनत बातें गीतों के माध्यम से भजन गायक देवीदीन आशु ने रमाबाई अंबेडकर की जयंती पर आयोजित भजन संध्या में बताई। उनका साथ देने के लिए कुमारी दीपा भारती ने भी महिलाओं को माता रमाबाई अंबेडकर के त्याग और बलिदान भरी कहानी गीतों के माध्यम से बताएं।

भजन संध्या से पहले अतिथियों ने माता रमाबाई अंबेडकर बाबा साहेब अंबेडकर महात्मा ज्योतिबा फुले माता सावित्रीबाई फुले सहित सभी बहुजन महापुरुषों की छायाचित्र पर फूल माला अर्पित कर मोमबत्ती जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
ग्राम काला देव में अंबेडकर युवा मित्र मंडल के बैनर तले बाबा साहेब अंबेडकर की पत्नी रमाबाई अंबेडकर की जन्म जयंती के उपलक्ष में एक विशाल और भाव भजन संध्या का आयोजन किया गया।

जिसमें पन्ना जिले के सुप्रसिद्ध भजन गायक देवीदीन आशु ने बाबा साहेब अंबेडकर और रमाबाई अंबेडकर सहित सभी महापुरुषों पर आधारित गीतों से ऐसी समा बांधी, पता ही नहीं चला की कब सुबह हो गई और देवी दिन आशु का साथ देने के लिए कुमारी दीपा भारती ने भी एक से बढ़कर एक गीतों की शानदार प्रस्तुति दी की क्या युवा क्या बुजुर्ग क्या जवान अपने आप को नाचने से नहीं रोक पाए




