इंदौर

इंदौर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का चक्काजाम: कलेक्टर इलैया राजा टी बोले-सब पर FIR होनी चाहिए, वाहन चालक होते रहे परेशान

इंदौर डेस्क :

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने चक्काजाम कर दिया। जिससे कलेक्ट्रेट तिराहे पर करीब एक घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहा। इस दौरान वाहन चालक परेशान होते रहे। उनकी प्रदर्शन कर रहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच बहस भी हुई। कलेक्टर इलैया राजा टी ने चक्काजाम पर नाराजगी जताई।

दरअसल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वेतन वृद्धि सहित अपनी कई मांगों को लेकर 15 दिनों से इंदौर में विरोध प्रदर्शनकर रहीं हैं। सोमवार को उन्होंने कलेक्टोरेट तिराहे पर चक्काजाम कर दिया। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें हटाने की कोशिश की, लेकिन वे हटने को तैयार नहीं थी। कुछ देर बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधमंडल कलेक्टर इलैया राजा टी से मिला। कलेक्टर ने कहा कि तुम लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए।

समझाइश देने गई पुलिस से भी की बहस
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कलेक्टोरेट तिराहे पर इकट्‌ठा हो गईं। यहां उन्होंने मानव शृंखला बनाई। इससे ट्रैफिक जाम हो गया। समझाइश देने पहुंची पुलिस से भी बहस की। इनकी मांगें है कि कई जिलों में तानाशाही कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, उन्हें वापस लिया जाए। हमें न्यूनतम वेतन दिया जाए, नियमितिकरण किया जाए। सेवा निवृत्ति पर एक मुश्त राशि व ग्रेजुएटी दी जाए।

उन्होंने कहा कि अन्य विभागों द्वारा हमसे जो काम लिया जाता है उसका सम्मानपूर्वक मान सम्मान दिया जाए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शासन-प्रशासन तानाशाही रवैया अपनाया रहा है। हमने कई बार कलेक्टर से मिलने की कोशिश की लेकिन वे नहीं मिले।

वाहन चालक होते रहे परेशान

उधर, ट्रैफिक बाधित होने से वाहन चालकों ने भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर गुस्सा जाहिर किया। इसे लेकर भी दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई। करीब एक घंटे नारेबाजी के साथ प्रदर्शन चलता रहा। इस दौरान एक एम्बुलेंस को भी रोका गया लेकिन फिर समझाइश के बाद उसे रास्ता दिया गया जबकि अन्य वाहन चालक परेशान होते रहे।

कुछ बाद इस बात पर सहमति बनी कि कुछ कुछ कार्यकर्ता कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेंगी। इसके बाद इनका प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर से मिला। तो उन्होंने नाराज होते हुए कहा कि इस तरह से प्रदर्शन करने ट्रैफिक बाधित हुआ है व लोगों को परेशान होना पड़ा। आंदोलन का यह तरीका ठीक नहीं है। ऐसे कदम उठाने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जानी चाहिए।

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