भोपाल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रात: कालीन बैठक में की भोपाल की सड़कों की स्थिति की समीक्षा दिए जरूरी निर्देश

भोपाल डेस्क : 

भोपाल की सड़कों को तुरंत दुरूस्त किया जाए। सड़कों के रख-रखाव के लिए नगर निगम और पीडब्ल्यूडी परस्पर समन्वय कर कार्य करें। सीवरेज और पानी की पाईप लाईन के लिए खोदी गई सड़कों का रेस्टोरेशन जिन ठेकेदारों ने नहीं किया है, उन पर कार्यवाही की जाए। एक पखवाड़े के बाद मैं पुन: सड़कों का निरीक्षण करूँगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रात:कालीन बैठक में भोपाल की सड़कों की स्थिति की समीक्षा करते हुए कही। नगर निगम आयुक्त वी.एस.कोलसानी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव लोक निर्माण नीरज मंडलोई तथा प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास मनीष सिंह वुर्चअली शामिल हुए। बताया गया कि तुलनात्मक रूप से अधिक वर्षा के कारण सड़कें प्रभावित हुई हैं।

गौ-संरक्षण को सामाजिक दायित्व बनाना आवश्यक – मुख्यमंत्री चौहान

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी बैठक में कहा कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से आयोजित गोवर्धन पूजा के माध्यम से हमें जन-जन को वृक्षारोपण, गो-वंश के संरक्षण और प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना है। गोवर्धन पूजा सही अर्थों में पर्यावरण और प्रकृति की पूजा है, इसका आरंभ भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। उन्होंने बृजवासियों से कहा था कि गोवर्धन पर्वत जंगल, घास और फल-फूल के माध्यम से लोगों और पशुओं को जीवन देता है। गोवर्धन पूजा का अर्थ पर्यावरण की रक्षा करना है और जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के संकट और प्रभावों को देखते हुए गोवर्धन पूजा अधिक प्रासंगिक हो गई है। आज आयोजित गोवर्धन पूजा से अधिक से अधिक किसान, पर्यावरण प्रेमी और जन-सामान्य को जोड़ा जाएँ।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गो-वंश की व्यवस्था के लिए गो-शालाओं को आत्म-निर्भर बनाने के लिए भी गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी। सड़कों पर रह रहे गो-वंश की सुरक्षा के लिए गो-वंश को गो-शाला तक लाने के कार्य को सामाजिक दायित्व के रूप में निभाने के लिए हर व्यक्ति को प्रेरित करें। वर्तमान में 1663 गो-शालाएँ संचालित हैं। साथ ही अन्य गो-शालाओं को भी सक्रिय किया जाएगा। पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देना आवश्यक है। वृक्षा-रोपण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भावी पीढ़ी को बचाने का उपयुक्त माध्यम है। गोवर्धन पूजा से वृक्षा-रोपण, प्राकृतिक खेती और गो-वंश के संरक्षण की गतिविधियों में अधिक से अधिक लोगों और गो-संरक्षण के लिए सक्रिय संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा।

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