भोपाल

शिक्षक नौकर नहीं, बच्चों का भविष्य गढ़ने वाले गुरू हैं, सभी शालाओं में बोर्ड पैटर्न पर होगी 5वीं और 8वीं की परीक्षाएँ, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नवनियुक्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को किया संबोधित

भारत के भाग्य विधाता हैं विद्यार्थी और विद्यार्थियों के निर्माता हैं शिक्षक – मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

 15 हजार नवनियुक्त शिक्षकों को दिया व्यवहारिक प्रशिक्षण

स्वामी विवेकानन्द, डॉ. राधाकृष्णनन, डॉ. अम्बेडकर के प्रसंगों से शिक्षकों को किया प्रेरित

मुख्यमंत्री ने स्वयं के स्कूल के अनुभव किए साझा

भोपाल डेस्क :

मध्य प्रदेश के नवनियुक्त शिक्षकों के लिए आज प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने व्यावहारिक प्रशिक्षण भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में देते हुए कहा कि प्रदेश की शालाओं में अध्ययनरत बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शासकीय शालाओं के साथ शासकीय मान्यता प्राप्त सभी अशासकीय और अनुदान प्राप्त शालाओं में 5वीं और 8वीं की परीक्षाएँ बोर्ड पैटर्न पर की जाएंगी। साथ ही इन शालाओं में आंतरिक मूल्यांकन भी नियमित रूप से सुनिश्चित कराया जाएगा। बच्चों का भविष्य गढ़ने का दायित्व शिक्षकों पर है। शिक्षक बच्चों को जैसा गढ़ेगें, वैसा ही देश और प्रदेश का निर्माण होगा। भारत के भाग्य विधाता विद्यार्थी हैं और विद्यार्थियों के निर्माता शिक्षक हैं। शिक्षकों के सम्मान और उन्हें प्रणाम करने के उद्देश्य से ही आज का यह कार्यक्रम किया गया है। 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि  “गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागू पाय – बलिहारी गुरू आपने, गोविन्द दियो बताय” के विचार को व्यवहार में लाने वाली संस्कृति है। गुरू हमारे लिए सर्वोपरि है विद्यार्थियों की प्रतिभा के सम्पूर्ण प्रकटीकरण का दायित्व शिक्षकों पर है। शिक्षक नौकर नहीं, बच्चों का भविष्य गढ़ने वाले गुरू हैं। उनके मार्गदर्शन और उनके द्वारा दी गई शिक्षा का ही परिणाम होता है कि व्यक्ति, समाज के पथ प्रदर्शन में सक्षम हो जाता है।

 ज्ञान, कौशल और नागरिकता के संस्कार देना शिक्षा के मुख्य उद्देश्य हैं। संचित ज्ञान को आगे पीढ़ी को हस्तांरित करना शिक्षक के साथ अभिभावकों का भी कर्त्तव्य है। कौशल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पर्याप्त प्रावधान किया गया है। विद्यार्थियों को नागरिकता के संस्कार देना सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। शिक्षक यह प्रण लें कि उनके विद्यार्थी, देश भक्त, चरित्रवान, ईमानदार, कर्त्तव्य परायण, दूसरों की चिंता करने वाले, बालिकाओं और महिलाओं के प्रति सम्मान रखने वाले, माता-पिता का आदर करने वाले और असहाय की सहायता करने वाले बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्वामी विवेकानन्द, डॉ. राधाकृष्णनन और डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया के व्यवहारिक बिन्दुओं का उल्लेख किया। साथ ही स्वयं के स्कूल के दिनों के अनुभवों को साझा करते हुए विद्यार्थियों के पालक और समुदाय के साथ शिक्षकों द्वारा संवाद बनाए रखने की आवश्यकता बताई। 

अपनी भाषा के गौरव को स्थापित करना आवश्यक है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को उनकी भाषा में शिक्षा देना आवश्यक है। इससे उनकी स्वाभाविक प्रतिभा प्रकट होती है। अपनी भाषा के गौरव को स्थापित करना आवश्यक है। हमें बच्चों को अंग्रेजी के भय से मुक्त करने की दिशा में भी कार्य करना है। प्रदेश में हिन्दी भाषा में मेडिकल की पढा़ई शुरू करने की व्यवस्था की जा रही है। आपके प्रयासों से ही प्रदेश शालेय शिक्षा में देश में पहले स्थान पर पहुँचेगा। स्वामी विवेकानन्द की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई काम ऐसा नहीं है जो आप नहीं कर सकते। शिक्षकों को अपना आचरण, आदर्श स्वरूप में रखना आवश्यक है। समय का पालन, स्वच्छता बनाए रखना, सदा सत्य बोलने के गुणों को शिक्षकों के दिन-प्रतिदिन के आचरण में अभिव्यक्त होना चाहिए। शिक्षक, शिक्षण में नवाचार और प्रयोग करें, स्वाध्याय करें, स्वयं को बदलती तकनीक और समय के अनुरूप ढालते रहें। साथ ही पालकों से सतत संवाद में बने रहें। बच्चों की कमजोरियों और अपेक्षाओं के बारे में उनके पालकों से बातचीत अवश्य करें।

मुख्यमंत्री ने शाला और शिक्षा प्रक्रिया को रूचि कर बनाने तथा शाला व्यवस्था में समुदाय को जोड़ने और स्कूली शिक्षा में नवाचार करने वाले शिक्षकों की सराहना की। राजगढ़ जिले के विकासखंड नरसिंहगढ़ की माध्यमिक विद्यालय गेहूँखेड़ा के मोहन विश्वकर्मा, दमोह के नवीन माध्यमिक विद्यालय लिधौरा के माधव पटेल, प्राथमिक शाला रघुनाथपुर राजगढ़ की श्रीमती ममता शर्मा, प्राथमिक शाला तूमड़ा नरसिंहपुर के हल्केवीर पटेल, शासकीय प्राथमिक विद्यालय कागदीपुरा धार के सुभाष यादव, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बैहर बालाघाट के जयंत खांडवे, शासकीय हाई स्कूल पुलिस लाइन शहडोल के  संतोष मिश्रा, एकलव्य विद्यालय शहडोल के बी.एम. तिवारी तथा  संदीप त्रिपाठी के कार्यों की प्रशंसा की।

 नवनियुक्त शिक्षकों में से प्रतीक स्वरूप 6 शिक्षकों को शुभकामना-पत्र और प्रशिक्षण सामग्री भेंट की। होशंगाबाद के तरोन कला की माध्यमिक शिक्षक सुश्री स्वाति यादव, निवाड़ी की सुश्री पूजा तिवारी, सीहोर के श्री कपिल सिंह ठाकुर, महेश्वर की सुश्री सपना गौतम, खालवा जिला खण्डवा की सुश्री गीतू कासडे और बैरसिया भोपाल की सुश्री वैशाली चौधरी को शुभकामना-पत्र और प्रशिक्षण सामग्री भेंट की।

स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षक की कार्यशैली और उनका व्यवहार विद्यार्थियों के लिए आदर्श होता है। शिक्षकों का कर्त्तव्य है कि वे अपना संपूर्ण समर्पण, शाला और समाज को प्रदान करें और अपने विद्यार्थियों को सर्वोत्तम ज्ञान, संस्कार उपलब्ध कराने के लिए हर-संभव प्रयास करें। मंत्री श्री परमार ने नवनियुक्त शिक्षकों को नए दायित्व में सफलता के लिए शुभकामनाएँ दी।

जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह ने भी संबोधित किया। 

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