भोपाल

शिवराज सिंह ने कहा कि सुन लें कमलनाथ और सुन लें दिग्विजय, सुन लें कांग्रेस के नेता, मामा गुंडों को छोड़ेगा नहीं, 21 हजार एकड़ जमीन गुंडों से हमने छुड़ाई है

भोपाल डेस्क :

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। वो लोग जो जमीनों पर कब्जा करते थे, कांग्रेस की सरकार और दिग्विजय जैसे नेता उन्हें समर्थन देती थी। 21 हजार एकड़ जमीन गुंडों से हमने छुड़ाई है। गुंडों पर कार्रवाई की बात होती थी तो दिग्विजय रामधुन की बात करते थे। शिवराज सिंह ने कहा कि सुन लें कमलनाथ और सुन लें दिग्विजय, सुन लें कांग्रेस के नेता, मामा गुंडों को छोड़ेगा नहीं। गुंडों से छुड़ाई गई जमीन गरीबों को दी जा रही है। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने नीलबड़ (भोपाल) में आयोजित कार्यक्रम में कही।

मुख्यमंत्री ने रविवार को भोपाल के केरवा डैम से 76 गांवों में भरपूर पानी देने के लिए 91 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की शुरुआत की। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसका भूमिपूजन किया। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद डेढ़ लाख आबादी को भरपूर पानी मिलने लगेगा। 91 करोड़ रुपए से 190 किलोमीटर पाइप लाइन बिछेगी। वहीं, नई और पुरानी 43 टंकियों की मदद से गांव-गांव पानी पहुंचाया जाएगा। ये सभी गांव केरवा डैम के आसपास है, लेकिन हर साल पानी को तरसते हैं। करीब 40 साल से वे पेयजल की समस्या परेशान हो रहे हैं। नीलबड़ में आयोजित कार्यक्रम में पेयजल लाइन समेत कुल 215 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का सीएम ने भूमिपूजन किया।

नीलबड़ में टंट्या मामा की मूर्ति लगेगी
सीएम ने कहा कि नीलबड़ में टंट्या मामा की मूर्ति लगाई जाएगी। गांव में जिनके पास रहने के लिए भूखंड नहीं हैं, उन्हें 4 जनवरी 2023 से प्रारंभ अभियान में प्राप्त आवेदनों के आधार पर नि:शुल्क रहने का पट्टा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री आवासीय अधिकार योजना में रिक्त भूमि निर्धन वर्ग को आवंटित की जाएगी। हुजूर क्षेत्र भी इससे लाभान्वित होगा। शहरी क्षेत्र में जो जहां रहे रहे हैं, जो पुराने कब्जाधारी हैं, उनको पक्का मकान बनाकर देने की योजना शुरू की जाएगी।

पेयजल परियोजना पर 91 करोड़ रुपए खर्च होंगे
विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि कुल 215 करोड़ रुपए के कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इनमें केरवा ग्रामीण पेयजल परियोजना पर 91 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं, 60 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री आवास पर, 40 करोड़ रुपए नीलबड़ से बढ़झिरी तक फोरलेन सड़क निर्माण पर और 24 करोड़ अन्य सड़कों के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे। केरवा ग्रामीण पेयजल परियोजना में जल-जीवन मिशन के अंतर्गत हुजूर के 76 गावों में हर-घर ‘नल से जल’ पहुचाने का लक्ष्य है। यह काम 24 महीने में पूरा होगा। 10 साल तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की ही रहेगी।

स्काडा सिस्टम से होगी मानीटरिंग
जानकारी के अनुसार, 50 हजार से ढाई लाख लीटर की 14 नई एवं 29 पुरानी टंकियों को योजना में शामिल किया गया है। इंटकवेल के साथ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट एवं लगभग 190 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जाएगी। योजना आधुनिक रूप से लैस है। लीकेज एवं अन्य समस्याओं को नवीनतम तकनीकी सिस्टम स्काडा के माध्यम से रखा जाएगा। इस सिस्टम के माध्यम से पूरी योजना पर आसानी से मानीटरिंग की जा सकती है। यदि भविष्य में क्षेत्र नगर निगम में शामिल होता भी है तो निगम को नई योजना बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

24 माह में पूरी होगी योजना
आगामी 24 माह में यह योजना पूरी होगी। निर्माण एजेंसी ही आगामी 10 वर्ष तक योजना का मेंटेनेंस करेगी। कार्य की मानीटरिंग भोपाल से लेकर दिल्ली तक की जाएगी। पंचायत अथवा गांव स्तर पर जल उपभोक्ता समिति का गठन भी किया जाएगा।

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