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सागर के जैन मंदिर एक बच्चें पूजा की थाली में से बादाम उठाकर खा लिया, पुजारी ने बच्चें को रस्सी से बांधकर रखा गया, पीटा

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छोटे बच्चें भगवान का रूप होते हैं पर उन्हीं बच्चों के साथ यदि इस तरह की मानवीय हरकत की जाए तो इसे क्या कहा जाएगा एक बच्चा यदि मंदिर में से प्रसाद उठा कर खा ले तो आपकी उस बच्चें के प्रति क्या भावना होगी, मामला सागर के एक जैन मंदिर का है जहां पर एक 11 वर्षीय बच्चा मंदिर में जा कर पूजा की थाली से प्रसाद उठा कर खा लेता है तभी पुजारी आ जाता है और उस बच्चे को रस्सियों से बांधकर उसकी पिटाई करता है क्या यह सही तरीका है सागर के जैन मंदिर की तस्वीर हैं, बच्चे को रस्सी से बांधकर रखा गया, पीटा गया परिजनों का कहना है मंदिर में प्रवेश कर पूजा की थाली से कुछ बादाम खा लिये थे. एफआईआर हो गई है. ईश्वर जहां भी होगा, देख ही रहा होगा … सुन रहा होगा ये चीख

कुछ जागरूक व्यक्ति अपनी अपनी राय दें रहें हैं सागर के जैन मंदिर के पुजारी राकेश जैन ने रस्सी से बांधकर एक 11 वर्षीय बालक को पीटा उसकी गलती सिर्फ इतनी थी की उसने मंदिर की बादाम अपनी जेब में रख ली थी,आरोपी राकेश जैन पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है,SC/ST एक्ट भी लगाया है।अब सड़ेगा जेल में राकेश “जैन”।

धर्म की धर्मांधता में चूर लोग धर्म क्या कहता है ये भी भूल जाते हैं। ईश्वर भी पृथ्वी पर आकर शर्म महसूस करते होंगे। अगर उस आदमी को मालूम होता कि मानवता सभी धर्मों से बढ़कर है, तो वह कदापि बच्चे को रस्सी से न बाँधता।

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