मध्यप्रदेश

समृद्ध 8 बड़े मंदिरों की सालाना आय 200 करोड़ तक: महाकाल लोक 129 करोड़ के साथ सबसे आगे

भोपाल डेस्क :

मप्र में तैयार हो रहे लोक श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बनते जा रहे हैं। प्रदेश के मंदिरों में रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इससे दान और चढ़ावे में भी लगातार इजाफा हो रहा है। अकेले महाकाल मंदिर में एक साल में दान और चढ़ावा 129 करोड़ रुपए आया है। यह प्रदेश के मंदिरों में सर्वाधिक है। दूसरे नंबर पर मैहर स्थित मां शारदा मंदिर है। प्रदेश के 8 बड़े मंदिरों को देखें तो सालाना इनमें करीब 200 करोड़ रुपए तक का दान आ रहा है।

प्रदेश में 22 हजार से अधिक मंदिर सरकार के अधीन हैं, लेकिन सिर्फ सलकनपुर मंदिर, महाकाल मंदिर, खजराना गणेश मंदिर और मैहर मंदिर का संचालन ट्रस्ट से किया जा रहा है। देश के एक प्रतिष्ठ अखबार ने ‘मंदिर ट्रस्ट बनाएं, सेवा धर्म निभाएं’ अभियान के तहत प्रदेश के मंदिरों की आय और खर्च को खंगाला तो पता चला कि कुछ मंदिर ट्रस्ट पाठशाला, भोजनशाला और बीमारों को दवाएं आदि मुहैया कराने का काम भी कर रहे हैं। उधर, कुछ मंदिरों ने आय-व्यय सार्वजनिक नहीं किया है।

महाकाल मंदिर (उज्जैन)…

तीन साल में दान की राशि पांच गुना तक बढ़ी

पीएम नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन करने आ रहे हैं। एक सितंबर 2022 से 12 सितंबर 2023 तक मंदिर में दान से 129.44 करोड़ रुपए आए। इसी अवधि में 2021 से 2022 में दान से 53.30 करोड़ और एक सितंबर 2020 से 30 सितंबर 2021 तक 24.75 करोड़ दान से प्राप्त हुए थे। मंदिर समिति के पास करीब 65 करोड़ की एफडी है। कलेक्टर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। मंदिर का वार्षिक खर्च 30 करोड़ था, जो अब 60 से 72 करोड़ तक पहुंच गया है।

मां शारदा मंदिर (मैहर)

18 करोड़ रुपए सालाना दान, 13 करोड़ मंदिर में खर्च हो रहे

मां शारदा देवी मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मुताबिक सालाना करीब 17-18 करोड़ की आय हो रही है। इसमें दान और चढ़ावा शामिल है। मंदिर में श्रृद्धालुओं की सुविधा और अन्य मदों से हर साल करीब 12-13 करोड़ खर्च हो रहा है। मां शारदा देवी मंदिर प्रबंधन समिति मैहर संचालन करती है। अधिकांश खर्च मंदिर और श्रद्धा​लुओं पर किया जाता है।

ओंकारेश्वर मंदिर (खंडवा)

9 करोड़ सालाना दान, सुरक्षा, रखरखाव और भोजन पर खर्च

मंदिर को 2020-21 में साढ़े 4 करोड़, 2021-22 में 5 करोड़ और 2022-23 में 9 करोड़ रुपए यानी कुल 18.5 करोड़ का दान मिला। इस राशि का इस्तेमाल मंदिर के रखरखाव, सौंदर्यीकरण, जनहित, सुरक्षा और भोजनशाला को चलाने पर होता है। मंदिर ट्रस्ट के लोगों का कहना है कि हमारी आय-व्यय का ब्योरा गोपनीय रखा जाता है।

सलकनपुर मंदिर (सीहोर)

सालाना आय 4 करोड़, चढ़ावे में सोना-चांदी भी मिल रहा

श्री देवी मंदिर समिति संचालन करती है। सभी मदों से मंदिर की वार्षिक आय करीब 4 करोड़ रुपए है। मंदिर के पास करीब 80 एकड़ कृषि भूमि और 1.50 करोड़ की एफडी है। साल में 30 से 40 किलो चांदी और 500 ग्राम तक सोना चढ़ावे में आता है। मंदिर प्रबंधन एक संस्कृत विद्यालय संचालित करता है, जिसमें दो शिक्षक और करीब 40 विद्यार्थी हैं।

आचार संहिता का वक्त है, अभी कुछ नहीं बता सकता

महाकाल मंदिर ट्रस्ट सरकारी है। इस समय आचार संहिता लगी है, इसलिए मैं ट्रस्ट के विकास कार्याें के बारे में नहीं बता सकता। चुनाव के बाद ही इस संबंध में बात की जा सकती है।
-कुमार पुरुषोत्तम, कलेक्टर, उज्जैन

22 हजार मंदिरों को 15 करोड़ रुपए की सहायता दे रहे

22 हजार मंदिरों को सरकार 15 करोड़ की सहायता दे रही है। चार मंदिरों में ट्रस्ट को ऑटोनोमस बॉडी का पॉवर दिया है। जनसहभागिता के कामों का निर्णय ट्रस्ट लेता है।
– सौरभ बंसल, सहायक संचालक, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व

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