विदिशामध्यप्रदेश

कालादेव का पत्थर मार दशहरा: पेड़ों पर चढ़कर पत्थर मार युद्ध का नजारा देखा, राम सैनिकों को एक भी पत्थर छू भी नहीं सका

आनंदपुर डेस्क :

विदिशा जिला मुख्यालय से लगभग 150 किलोमीटर दूर लटेरी तहसील के ग्राम काला देव में महाराजा रावण को जलाया नहीं जाता बल्कि दशहरे के दिन एक अनोखी परंपरा के तहत पत्थर मार युद्ध का आयोजन किया जाता है। एक और राम सेना के सैनिक ध्वज की परिक्रमा लगाने दौड़कर जाते हैं दूसरी ओर रावण दल के सैनिक राम सैनिकों पर गोफान से पत्थर बरसाते हैं लेकिन एक भी पत्थर राम सैनिकों को नहीं लगता।
सदियों पुरानी है परंपरा 
राम रावण की सेना में पत्थर मार युद्ध का आयोजन दशहरे के दिन किया जाता है इस अनोखी परंपरा के पीछे एक मान्यता रही है सदियों पहले टोंक रियासत के नवाब ने इस  दशहरे के आयोजन को बंद करने की कोशिश की थी उस समय कहा गया था कि आप लोग अंधविश्वास फैला रहे हैं। जानबूझ कर पत्थर नहीं मारते, तब ग्रामीणों ने काफी समझाया लेकिन नहीं नवाबी शासन काल में रियासत के लोग नहीं, टोंक नवाब ने कहा कि मैं यहां से गोली से निशान साधूंगा, अगर किसी को पत्थर लग गया तो आज से ही दशहरे का आयोजन बंद कर दिया जाएगा। तब ग्रामीण जन इसके लिए भी राजी हो गए नवाब ने गोली चलाई लेकिन किसी भी राम सैनिक को गोली छू भी नहीं सकी। तभी से ग्रामीण जन और भी उत्साह के साथ पत्थर मार युद्ध दशहरे का आयोजन करने लगे।
रामेश्वर शर्मा ने बताया कि सदियों पहले मिट्टी की रावण प्रतिमा बनाकर पत्थर मार युद्ध का आयोजन किया जाता था। बर्ष 1993- 94 में लक्ष्मीकांत शर्मा जब पहली बार विधानसभा चुनाव जीते थे उन्हीं ने महाराज रावण की विशालकाय प्रतिमा बनवाई थी तभी से दशहरे के अवसर पर यहां बड़े स्तर पर आयोजन किया जाने लगा और यह सदियों पुरानी परंपरा है हम हमारे जन्म से ही इसी तरह से पत्थर मार युद्ध देखते आ रहे हैं राम सेवा में स्थानीय ग्राम कालादेव के नागरिक और रावण दल में बाहर के भील बंजारे समुदाय के लोग सम्मिलित होते हैं यदि धोखे से कोई बाहर का व्यक्ति राम दल में सम्मिलित होकर ध्वज की परिक्रमा लगाने जाता है तो उसको पत्थर लग सकता। ऐसा कई बार देखने को भी मिला है कि जो बाहर का व्यक्ति राम सेवा में सम्मिलित होकर ध्वज की परिक्रमा लगाने की कोशिश करता है उसे पत्थर लग जाता लेकिन स्थानीय ग्रामीणों को पत्थर नहीं लगता और धोखे से लग भी जाए तो कोई चोट नहीं आती।
एक पत्थर का वजन होता है 300 ग्राम तक
रावण दल में शामिल मांगीलाल भील ग्राम देवीपुरा, बद्री भील जरसेना, सौदान सिंह नारायणपुर, सीताराम भील जरसेना ने बताया कि हम लोग लगभग एक सप्ताह से इन पत्थरों को चुन चुन कर तरसते हैं चिकना करते हैं हम गोफान से इन पत्थरों को लगभग 500 मीटर तक फैंक सकते हैं। इस बार हमारे साथ कल 29 लोग रावण दल में शामिल है
और वह राम दल के सैनिक जो बीच मैदान में राम की ध्वजा पताका लगी हुई है उसकी परिक्रमा करने आते हैं तो हम उन पर गोफानों से पत्थर मरते हैं। लेकिन किसी को कोई पत्थर नहीं लगता जबकि हमारा निशान अचूक रहता है हम पेड़ पर बैठी हुई चिड़िया को भी एक बार में मार कर नीचे गिरा सकते हैं लेकिन राम सेवा के सैनिकों को कोई पत्थर नहीं लगता जो व्यक्ति बाहर का राम सेवा में सम्मिलित होता है उसको जरूर लग जाता है।
पेड़ों और छटो पर चढ़कर देखा नजारा
पत्थर मार युद्ध का नजारा देखने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।  गुना, राजगढ़, विदिशा के जिलों के लगभग 25 से 30 हजार लोग पहुंचे।
इन लोगों को व्यवस्थित तरीके से की कोई मैदान में ना आए क्योंकि जब रावण दल की ओर से जो पत्थर गोदान से बरसाए जाते हैं वह किसी को भी लग सकता। पत्थर मार युद्ध का नजारा लोगों ने घर की छतों , पेड़ों और टीन शेटों पर चढ़कर नजारा देखा।
पहले लगते थे सात बार परिक्रमा अब लगते हैं पांच बार।
पहले रामध्वज की परिक्रमा करने के लिए राम सैनिक क्रमशः सात बार मैदान में दौड़कर चक्कर परिक्रमा लगाते थे लेकिन समय अनुसार यह कम घटना गया और अब तीन बार ही ध्वज की परिक्रमा करने आते हैं राम जी का रथ जरूर परिक्रमा के बाद 5 बार पूरे मैदान में चक्कर लगाता है।
 रावण, मेघनाथ, राम लक्ष्मण के बीच हुआ घमासान युद्ध राम ने एक ही अग्निबाण छोड़कर रावण के प्राण हर लिए। तब चारों ओर जय श्री राम के नारे गूंज उठे, जैसे ही रावण का वध हुआ राम जी का रथ बीच मैदान में आकर रुक जहां पर विधायक उमाकांत शर्मा, गगनेंद्र रघुवंशी , जिला पंचायत सदस्य पार्वती रघुवंशी ने भगवान राम की पूजन अर्चना कर क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना की।

 

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