मध्यप्रदेश

प्रदेश की राजधानी को ग्रीन कैपिटल बनाने की तैयारी: 1100 मेगावॉर सोलर एनर्जी से रोशन होगा भोपाल

इंदौर-उज्जैन भी सोलर सिटी बनेंगे

भोपाल डेस्क :

भोपाल शहर में कार्बन उर्त्सजन नियंत्रित करके क्लीन कैपिटल के साथ ही ग्रीन कैपिटल बनाने के लिए सोलर सिटी बनाने के लिए वातावरण तैयार करके अगले 2 महीने में घरों और विभिन्न स्थलों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। गुरुवार को कमिश्नर ऑफिस में हुई मीटिंग में भोपाल में क्रमबद्ध तरीके से 1100 मेगावॉट सोलर एनर्जी प्लांट और उपयोग का लक्ष्य निर्धारित कर क्रमबद्ध ढंग से जन सहयोग से अमल करने का निर्णय लिया गया। इंदौर-उज्जैन भी सोलर सिटी बनेंगे।

बैठक में महापौर मालती राय, प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय दुबे, संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ऊर्जा विकास निगम के एमडी गणेश शंकर मिश्रा, नगर निगम कमिश्नर फ्रेंक नोबल ए. सहित बिजली कंपनी, निगम के अधिकारी भी मौजूद थे।

मीटिंग में यह लिया फैसला
बैठक में तय किया गया कि भोपाल को सोलर सिटी बनाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए शीघ्र ही वातावरण निर्माण करने के लिए सभी 21 जोन में जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को अपने आवास की छतों सहित अन्य स्कूल, कॉलेज और शासकीय ऑफिसों में सोलर पैनल लगवाने का अभियान चलाया जाएगा। तय किया गया कि भोपाल में 1100 मेगावॉट सोलर एनर्जी के लक्ष्य को क्रमबद्ध तरीके से प्राप्त किया जाएगा और अगले 2 माह में लगभग 25 हजार स्थलों पर सोलर पैनल लगाने के प्रयास किए जाएंगे। भोपाल में वर्तमान में 2000 मेगावॉट बिजली की खपत है।

प्रोजेक्ट और सबसिडी के बारे में बताया
प्रमुख सचिव दुबे ने इस अभियान के लिए शासन के विशेषत: ऊर्जा विकास निगम के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने एक से 3 किलोवॉट के घरेलू सोलर पैनल के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और अनुदान आदि के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने रहवासी संघों के बीच विशेष अभियान चलाकर प्रतिस्पर्धा जागृत करने और इससे होने वाले फायदों के बारे में भी बताया। प्रमुख सचिव दुबे ने नगर निगम से एक सुसंगत कार्य योजना के साथ भोपाल को सोलर सिटी बनाने के लिए अग्रणी भूमिका निभाने की अपेक्षा की। उन्होंने बताया कि भोपाल में 1100 मेगावॉट सोलर एनर्जी के इस्तेमाल से यह क्षमता 285 लाख पेड़ों के बराकर कार्बन उत्सर्जन सोखने की होगी।

पांच साल में यूनिट की लागत वसूल होगी
बैठक में प्रमुख सचिव दुबे ने कहा कि सोलर यूनिट लगाने की लागत पांच साल में वसूल हो जाती है और अगले बीस साल तक मुफ्त बिजली मिल जाती है। कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए लोगों को सौर ऊर्जा अपनानी चाहिए। अधिक से अधिक लोगों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनी एक दिन में सोलर सिटी के लिए नेट मीटर लगा देगी। बिजली कंपनी की टीम नगर निगम की टीम के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाएगी, वार्डों में प्रजेंटेशन भी दिया जाएगा।

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