रंग पंचमी पर लाखों श्रद्धालु पहुंचे करीला धाम: सीएम यादव ने की माता सीता की पूजा-आरती; कल तीन दिवसीय मेले का आखिरी दिन

न्यूज़ डेस्क :
अशोकनगर के करीला धाम में रंगपंचमी के मौके पर ऐतिहासिक मेले में अब तक करीब 10 लाख लोग माता सीता के दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शनिवार शाम करीब साढे़ 5 बजे करीला पहुंचे। उन्होंने माता सीता की पूजा-आरती की। सीएम करीब 40 मिनट मंदिर परिसर में रुके।
इससे पहले सुबह मंदिर के परकोटा के अंदर की गुफा को खोलकर दीप जलाया गया। गुफा 24 घंटे तक श्रद्धालुओं के लिए खुली रहेगी। हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान राम के त्यागने के बाद माता सीता करीला में बने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही रुकी थी। यहां बनी गुफा में उन्होंने लव और कुश को जन्म दिया था। लव और कुश के जन्म के वक्त स्वर्ग से उतरीं अप्सराओं ने करीला में नृत्य किया था।
इसी मान्यता को लेकर रंगपंचमी पर करीला में राई नर्तकियों का बधाई नृत्य कराने की परंपरा है। इसके लिए यहां तीन दिवसीय मेला लगता है। इसकी शुरुआत शुक्रवार को हुई थी और समापन रविवार को होगा।

मन्नत पूरी होने पर राई नृत्य कराने की परंपरा
पुजारी ने बताया कि करीला धाम को पहले वाल्मीकि आश्रम के नाम से जाना जाता था। रंगपंचमी के मौके पर सीता माता मंदिर के पास करीला पहाड़ी के निचले हिस्से में मेला लगता है। यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के जरूरत की चीजों और मनोरंजन की व्यवस्था होती है।
उन्होंने कहा, ‘दूर-दूर से आए श्रद्धालु करीला धाम में आकर मन्नत मांगते हैं। उसके पूरे होने पर माता के दरबार में राई नृत्य कराते हैं। राई नृत्य बच्चे होने, नौकरी लगने यहां तक कि चुनाव जीतने सहित हर प्रकार की मन्नत के लिए कराया जाता है।’

भगवान राम के बिना सीता का एकमात्र मंदिर
श्रद्धालुओं ने बताया कि देशभर में करीला धाम ही ऐसा मंदिर है, जहां भगवान राम की प्रतिमा नहीं है। यहां माता सीता, लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाएं हैं। भगवान राम के बिना ही माता सीता की पूजा की जाती है।
रंगपंचमी की सुबह से ही मंदिर के साथ पहाड़ी के आसपास भी राई नृत्य होते हैं, जो अगली सुबह तक चलते हैं। मेला का समापन छठ के दिन होता है। इस दिन राई नतृकियां इकट्ठा होकर एक साथ नृत्य करती हैं। इसे ‘घेरा की राई’ कहा जाता है।



