इंदौर

जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में इंदौर शहर में 2 दिन रहेंगे पूर्व मुख्यमंत्री: दिग्गी की तीन और सांवेर सीट पर कांग्रेस का फोकस, यह तीन दशक से नहीं मिली जीत

इंदौर डेस्क :

कर्नाटक की जीत से उत्साहित कांग्रेस मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मैदान संभाल चुकी है। अगले महीने 12 जून को जबलपुर में प्रियंका गांधी के मेगा रोड शो के साथ कांग्रेस मप्र में अपने चुनावी अभियान का आगाज भी करेगी।

इस बीच इंदौर में बीते करीब पांच महीने से खाली पड़ी कांग्रेस शहर अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर बड़ी अपडेट कांग्रेस नेताओं की ओर से दी गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री और विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि अध्यक्ष का फैसला हो चुका है, सिर्फ घोषणा बाकी है और जल्द ही नाम का ऐलान हो जाएगा।

वहीं इंदौर शहर और ग्रामीण की ऐसी सीटें जो कांग्रेस लंबे समय से हार रही है, उन्हें जीतने के लिए कांग्रेस की रणनीति बनाने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह इसी महीने इंदौर आकर बैठक लेंगे।

कब आ रहे दिग्विजय, जिन सीटों को चिह्नित किया है उनकी क्या स्थिति है ये भी जान लीजिए…

विधानसभा चुनाव को लेकर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों ऐसी सीटों का दौरा कर रहे हैं, जहां कांग्रेस को लंबे समय से हार का सामना करना पड़ रहा है। इन सीटों पर जीताऊ उम्मीदवार की तलाश के साथ ही जीत के लिए क्या रणनीति हो सकती है, इस पर कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है।

इसी कड़ी में दिग्विजय दो दिनी प्रवास पर इंदौर आ रहे हैं। वे 22 और 23 मई को इंदौर में रहेंगे। उन्होंने शहर की तीन विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है, जिसमें 2,4 और 5 नंबर सीट शामिल है। पहले दिन तीनों सीट के संबंध में बैठक लेंगे। इसके बाद अगले दिन सांवेर सीट को लेकर ग्रामीण कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे।

1993 से भाजपा के पास है दो नंबर सीट

बता दें 2 नंबर विधानसभा सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने 1993 में जीत हासिल की थी तब से ये सीट बीजेपी के पास है। तीन बार कैलाश विजयवर्गीय विधायक रहे। इसके बाद उनके खास रमेश मेंदोला को यहां से साल 2008 में टिकट दिया गया और तब से वे लगातार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। वे भी तीन बार के विधायक हैं।

वहीं 4 नंबर विधानसभा सीट 1990 से बीजेपी के पास है और कांग्रेस को यहां हर संभव कोशिश के बावजूद हार का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह पांच नंबर विधानसभा सीट बीजेपी 2003 से जीत रही है। इससे पहले यहां कांग्रेस के विधायक रहे हैं।

यही वजह है कि शहर की इन तीन सीटों का चयन दिग्विजय सिंह ने किया है, हालांकि 3 नंबर विधानसभा सीट भी बीजेपी के पास है लेकिन कांग्रेस इसे भाजपा के गढ़ के रूप में नहीं देख रही है। वहीं सांवेर विधानसभा सीट को भी उन चुनिंदा सीटों में लिया गया है, जिसे लेकर खास रणनीति कांग्रेस तैयार करेगी।

पिछले विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस उम्मीदवार तुलसीराम सिलावट ने जीत दर्ज की थी लेकिन बाद में वे ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हो गए और उपचुनाव में वे भाजपा के टिकट पर यहां से विधायक बने। अब इस सीट पर कांग्रेस के पास कोई मजबूत विकल्प नहीं है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद गुड्‌डू की बेटी रीना बौरासी सेतिया जरूर यहां से दावेदारी जता रही हैं। वैसे गुड्‌डू की बेटी के अलावा यहां से दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। गुड्‌डू खुद चुनाव लड़ने से इनकार कर चुके हैं। उन्होंने पिछला सांवेर उपचुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था।

वहीं देपालपुर सीट कांग्रेस के पास है, वहां से विशाल पटेल विधायक है। इसी तरह इंदौर 1 नंबर सीट से संजय शुक्ला विधायक है। राऊ सीट भी कांग्रेस के पास है, जबकि महू सीट पर बीजेपी का कब्जा है।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष के नाम की घोषणा भी जल्द…गुटबाजी से बचने ये फॉमूर्ला अपना सकती है कांग्रेस…

मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में से एक इंदौर में कांग्रेस लंबे समय से नेतृत्वहीन है। विनय बाकलीवाल की जगह अरविंद बागड़ी को शहर कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन उनकी नियुक्ति बाद में होल्ड कर दी गई और तब से मामला अटका हुआ है।

हालांकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इंदौर के संगठन प्रभारी महेंद्र जोशी को इंदौर का प्रभार दे रखा है, मगर वे भी अपनी अन्य व्यस्तता के कारण इंदौर को कम ही समय दे पा रहे हैं। जिसके चलते कांग्रेस के अभियान और चुनावी गतिविधियां भी लगभग ठंडे बस्ते में चली गई हैं।

चुनावी साल में अब कांग्रेस आलाकमान शहर अध्यक्ष की नियुक्ति को लंबा खींचने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सामने समस्या ये है कि अगर किसी एक को शहर अध्यक्ष बनाया तो गुटबाजी उभर सकती है, जिसे संभालना मुश्किल होगा, ऐसे में पूर्व में आजमाए गए 4 कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष का फार्मूला इंदौर में भी लागू करने पर भी विचार हो रहा है।

एक शहर अध्यक्ष के स्थान पर चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं, ताकि गुटबाजी और असंतोष को रोका जा सके साथ ही जातिगत समीकरणों को भी साधा जा सके। मामला दिल्ली में पेंडिंग है और वहां से अनुमति मिलने पर कभी भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर देगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह इसी महीने अपने दो दिनी प्रवास पर इंदौर आ रहे हैं। उनके आने के पहले माना जा रहा है कि हर हाल में शहर अध्यक्ष को लेकर मची खींचतान खत्म हो जाएगी। अब जल्द ही शहर अध्यक्ष के नाम का खुलासा कर दिया जाएगा।

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