मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना ने 6 लाख ओबीसी छात्रों की 482 करोड़ की स्कॉलरशिप रोकी: कई नोटशीट लिखने के बाद भी नहीं मिला पैसा

भोपाल डेस्क :

मप्र के 6 लाख ओबीसी स्टूडेंट्स की 482 करोड़ रुपए की पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप रुक गई है। यह वो पैसा है, जो उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों में फीस के रूप में जमा करा दिया है। इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई की पूरी फीस के साथ ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के स्टूडेंट्स को मिलने वाला पैसा भी इसमें शामिल है। इसके अलावा हॉस्टल और गैर हॉस्टल में रहने का किराया भी छात्रों को नहीं मिला है।

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वित्त विभाग से बार-बार तकाजा करने और नोटशीट लिखने के बाद भी पैसा रिलीज नहीं हुआ। पिछले सप्ताह और 4 दिन पहले मंगलवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री कृष्णा गौर ने विभाग के अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी और बाकी अधिकारियों के साथ बैठक की। उसमें भी यह मसला उठा। इसमें कहा गया कि वित्त विभाग से बात करके पैसा रिलीज कराया जाए।

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि लाड़ली बहना योजना की वजह से कई विभागों के बजट में अड़ंगा लगा है, इसमें छात्रों की स्कॉलरशिप भी शामिल है। यह इंजीनियरिंग की 30-35 हजार रुपए और मेडिकल की 5 हजार रुपए से लेकर 10 लाख तक है। बताया गया है कि कुछ पैसा 15 फरवरी के करीब जारी हो सकता है, पर नए वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही अब पूरी राशि मिलेगी।

पहले एक साल विलंब से मिलती थी स्कॉलरशिप, इस बार दो साल हो गए :

वर्ष 2021-22 में दी जाने वाली स्कॉलरशिप 350 करोड़ होती है, इसमें से 150 करोड़ ही अभी तक मिले हैं। करीब 200 करोड़ रुपए बाकी हैं। इसमें किराए और पूर्व के सालों के रिनुअल वाले प्रकरण भी शामिल हैं। यानी 2022-23 में वित्त विभाग से कुल 482 करोड़ मिलने हैं। इसी तरह 2022-23 का 600 करोड़ तो अभी मिला ही नहीं। साथ ही 2023-24 के बजट की अभी कोई बात ही नहीं हो रही।

बजट के 400 करोड़ बचे हैं, फिर भी नहीं मिल रहे

250 करोड़ होती है प्री मैट्रिक की स्कॉलरशिप जो स्टूडेंट्स को मिल रही है। पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप रुकी हुई है।

स्कॉलरशिप की शर्त

  • नीट से प्रदेश के सरकारी कॉलेज में प्रवेश लेने वाले या मप्र के निजी कॉलेजों में जाने वाले छात्रों की फीस भरी जाती है।
  • जेईई से 1.50 लाख तक मेरिट में आने वाले ओबीसी स्टूडेंट्स को भी पात्र माना जाता है।
  • ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट (सामान्य विषय) भी इसमें शामिल हैं।

विभाग का बजट 900 करोड़

विभाग का कुल बजट 900 करोड़ है, इसमें अभी तक 500 करोड़ रुपए का उपयोग हुआ है। करीब 400 करोड़ रुपए बाकी है। पहले सप्लीमेंट्री बजट में 400 करोड़ मिले थे, लेकिन दो दिन पहले विधानसभा में पेश हुए दूसरे सप्लीमेंट्री में पिछड़ा वर्ग कल्याण की स्कॉलरशिप के लिए कोई पैसा नहीं रखा गया।

किराया भी रुका है… इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई करने वालों को हॉस्टल में रहने पर 850 रुपए और गैर हॉस्टल वालों को 380 रुपए मिलते हैं। डिप्लोमा वालों को क्रमश: 450 और 230 रुपए मिलते हैं। बीए-बीएससी और बीकॉम को 400 और 230 रुपए हर माह मिलते हैं। यह पैसा भी नहीं मिला।

News Update 24x7

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!