मध्यप्रदेश के मुफ्त वाले माननीय: मेरा परिवार भी वीआईपी, टोल बूथ पर दूसरी गाड़ी को भी दें छूट
भोपाल डेस्क :
आखिरकार माननीयों का अपना रुतबा है! यह रुतबा उन्हें स्टेट और नेशनल हाईवे के टोल बूथ पर भी चाहिए। इनके वाहनों को तो छूट मिली ही है, लेकिन विधायकों को अब परिवार को भी वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना है। यही वजह है कि उन्होंने परिवार के वाहन को भी स्टेट और नेशनल हाईवे पर टोल फ्री करने की डिमांड रखी हैं। हालांकि, इसे ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है। विधायकों की यह मांग पूर्व विधायकों द्वारा टोल बूथ पर छूट की मांग के बाद आई है। दरअसल, पूर्व विधायकों ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए अपने वाहनों को सभी हाईवे पर टोल फ्री करने की मांग रखी थी। यह जानकारी वर्तमान विधायकों को मिली तो उन्होंने लगे हाथ अपने परिवार को भी वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया। दोनों ही मामलों में विधानसभा ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था। लेकिन, विधायकों के दूसरे वाहन को टोल फ्री करने के लिए ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है। पूर्व विधायकों के मामले में भी लोक निर्माण विभाग ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को प्रस्ताव भेजा है। वहां इसका परीक्षण चल रहा है।
विधायक
स्टेट हाईवे पर 2013 से टोल नहीं लगता। नेशनल हाईवे के लिए कुछ समय पहले सरकार ने एक वाहन के लिए फास्टैग दे रखा है। यह स्कैन होते ही जीरो पेमेंट पर वाहन निकल जाता है।
पूर्व विधायक
विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में विधायक हैं, तो टोल पर एक्जम्प्ट होने के पात्र हैं। फास्टैग मिलता है। यदि पूर्व अध्यक्ष वर्तमान में विधायक नहीं हैं तो कोई छूट नहीं मिलती है।
मध्यप्रदेश में 230 विधायक, 500 से ज्यादा पूर्व विधायक
विधानसभा के 230 सदस्यों में से सीएम, विधानसभा अध्यक्ष और 30 मंत्रियों की सुविधाओं की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग के पास है। बाकी 500 से ज्यादा पूर्व विधायकों की सुविधा विधानसभा सचिवालय देखता है।
विधायकों की सदस्य सुविधा से संबंधी प्रस्ताव मिले हैं, जिसमें से विधायकों को तो टोल पर छूट दिए जाने के साथ एनएचएआई के टोलों पर जीरो बैलेंस का फास्ट टैग दे दिया गया है। पूर्व विधायकों को टोल पर छूट दिए जाने संबंधी मामले का परीक्षण कर रहे हैं।
गोपाल भार्गव, मंत्री, लोक निर्माण विभाग
पूर्व विधायकों की छूट का प्रस्ताव अभी विचाराधीन
विधायकों के स्वयं के वाहन के साथ एक और वाहन को छूट दिए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें विधायक के स्वयं के वाहन को तो छूट दे दी गई है। एक अन्य वाहन के लिए वे छूट चाहते हैं, जो नहीं दी गई है। पूर्व विधायकों के वाहनों वाला प्रस्ताव भेजा गया है, जो विचाराधीन है।
-एपी सिंह, प्रमुख सचिव, मप्र विधानसभा



