मध्यप्रदेश

लोकसभा चुनाव- 2024 से पहले खर्च का बैरियर हटा: 120 योजनाओं के खर्चे पर वित्त विभाग ने लगाई थी रोक

भोपाल डेस्क :

लोकसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने 120 योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाले खर्च पर लगी रोक हटा दी है। ये योजनाएं 31 विभागों की हैं, जिनमें अब वित्त विभाग की तय नीति के हिसाब से राशि खर्च की जा सकेगी। चुनाव के पहले सरकार का फोकस अटल ज्योति योजना में 100 यूनिट बिजली 100 रुपए में दिए जाने, गोशालाओं के संचालन पर खर्च, गांव की बेटी और सरकारी कॉलेजों के भवन के निर्माण पर खर्च होने वाली राशि पर है।

इसके साथ प्रदेश की 26 हवाई पट्टियों के विस्तार का काम शुरू हो सकेगा। सरकार के 14 बड़े विभाग इस महीने में 7323 करोड़ रुपए खर्च कर सकेंगे। 31 मार्च तक 30 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाना है। इसमें बड़ी राशि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को 2400 करोड़ रुपए दी गई है। इस राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल खासतौर पर बंद पड़ीं नल-जल योजनाओं के चालू करने, लोगों के घर पर नलों से पानी दिए जाने पर खर्च होंगे। यानी गर्मी में कहीं भी पेयजल की दिक्कत न हो, जिसका असर चुनाव पर पड़े। उज्जैन में होने वाले व्यापारिक मेले में उद्योगों को प्रोत्साहन देने और इस आयोजन पर 92 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

फोकस सड़कों पर- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर की सड़कें

प्रदेश में सड़कों की मरम्मत और नए निर्माण पर 2055 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसमें से 1200 करोड़ रुपए इसी महीने में खर्च किए जाने हैं। 52 जिलों में भोपाल में बरखेड़ी देव मंदिर परिक्रमा पथ (11 किमी) पर 11 करोड़ रुपए, तरावली मंदिर मां हरसिद्धी पथ निर्माण (2 किमी) पर 2 करोड़ रुपए, रोढिया जाफराबाद सड़क (4 किमी) पर 4 करोड़ रुपए और बम्होरी दमीला जोड़ मार्ग पर 6 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

नगरीय विकास एवं आवास पर 878 करोड़ रुपए

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत प्रदेश के 412 नगरीय निकायों के लिए 878 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस राशि से अधोसंरचना विकास के चल रहे काम निकायों में बनने वाली सड़कों का निर्माण काम शुरू हो सकेगा। इसके साथ ही नगरपालिकाओं में पेयजल योजनाओं के कामों के लिए दिए गए हैं।

25 करोड़ से ज्यादा की निकासी पर अभी रोक

वित्त विभाग ने 25 करोड़ रुपए से ज्यादा के खर्चे पर अभी भी रोक लगाई हुई है। यह रोक पिछले एक साल से लगी है। यह रोक इसलिए लगाई गई है कि विभाग बड़ी राशि निकाल तो लेते हैं लेकिन खर्च नहीं कर पाते हैं। इसलिए उतनी ही राशि निकाली जाए जितनी खर्च हो सके।

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