योजनाएं, जो सिर्फ बनी!: मैग्नेटिक ट्रेन, रोप-वे, ग्रेड सेपरेटर से लेकर गोल्फ कोर्स, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे दर्जनों प्रोजेक्ट, शुरू तक नहीं हुए

इन्दौर डेस्क :
बीआरटीएस पर एलिवेटेड कॉरिडोर की 6 साल से चल रही प्लानिंग अंतत: ध्वस्त हो गई। अब नए सिरे से प्लानिंग की जा रही है कि इस रूट पर फ्लायओवर बनाए जाएंगे। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अफसर और जनप्रतिनिधि मिलकर शहर के लिए दर्जनों योजनाएं बना चुके हैं, लेकिन वे कभी अमल में नहीं आ सकीं।
जवाहर मार्ग पर मेयर रहते मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मैग्नेटिक ट्रेन चलाने का प्लान बनवाया था। फिर मेयर रहते ही डॉ. उमाशशि शर्मा ने यहां एलिवेटेड रोड बनाने की प्लानिंग करवाई। फिलहाल ट्रैफिक मैनेजमेंट यहां वन-वे करके किया जा रहा, लेकिन वन-वे का पालन भी 100 फीसदी नहीं हो रहा। इसी तरह मेयर मालिनी गौड़ के कार्यकाल में एक एमआईसी मेंबर ने बड़ा गणपति से महू नाका तक एलिवेटेड कॉरिडोर की प्लानिंग करवाई तो पश्चिमी रिंग रोड के चंदन नगर वाले हिस्से में भी एलिवेटेड रोड बनाने का सर्वे और प्लानिंग हो चुकी है।
देखिए 25 साल में बने प्लान और जमीनी हकीकत
- मास्टर प्लान-2021 : खत्म हो गया पर अमल 57 प्रतिशत। एमआर-3, एमआर-5, एमआर-6, एमआर-9, एमआर-11, एमआर-12, आरई-2 प्लान में कहीं आधी बनी, कहीं बन ही नहीं पाई। नया प्लान भी 3 साल में नहीं बना।
- जोनल प्लान : बने पर अमल एक पर भी नहीं हुआ। कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान भी बना, लेकिन अमल 50 प्रतिशत भी नहीं हुआ।
- दोहा की कंपनी से सुपर कॉरिडोर की मास्टर प्लानिंग करीब 10 साल पहले करवाई, लेकिन अमल नहीं हुआ।
- टीओडी : दस्तावेज बनकर रह गया ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) प्लान।
- टीडीआर : 8 साल में पॉलिसी बनी, लेकिन अमल में अभी भी की कई पेंच।
- शहीद पार्क : 8 साल पहले 3 करोड़ की लागत से बना। आज तक जनता के लिए नहीं खुला।
- प्लानिंग के नाम पर शहर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, मेडिकल हब, ट्रांसपोर्ट नगर, फिनटेक सिटी की प्लानिंग ध्वस्त हो चुकी है।
- यशवंत सागर : टूरिस्ट स्पॉट बनाने की घोषणा पूर्व मेयर कृष्णमुरारी मोघे के समय हुई, पर काम नहीं हुआ।
- देवगुराड़िया से रालामंडल तक रोप-वे : 10 साल से प्रस्ताव वन विभाग और सरकारी दफ्तरों में घूम रहा।
- उज्जैनी, गुलावट : प्रशासन यहां पर्यटन क्षेत्र बनाना चाहता है। 4 कलेक्टर निकल गए, आज तक कोई काम नहीं हुआ। उज्जैनी में तो पानी भी साफ नहीं होता।
अब भी प्लानिंग जारी है…
- मेट्रो ट्रेन : 2012 में मुख्यमंत्री ने मेट्रो चलाने की बात कही थी। 2019 में प्रोजेक्ट शुरू हुआ। 2022, 2023 के बाद अब 2025 में कमर्शियल रन का दावा है।
- केबल कार : शहर के अलग-अलग जोन में इसके लिए सर्वे हो चुका है।
- चौराहों का सुधार : 21 चौराहों के लिए फिजिबिलिटी सर्वे हो रहा है। कहां फ्लायओवर, कहां एलिवेटेड रोड या कहां ग्रेड सेपरेटर बनाएं, यह तय होना बाकी है।
- अहिल्या वन के साथ गोल्फ कोर्स की भी प्लानिंग हो रही है। इस तरह की प्लानिंग पूर्व संभागायुक्त एमआर-3 पर 10 साल पहले कर चुके हैं।
एक्सपर्ट :
अफसर-जनप्रतिनिधि भले बदल जाएं, एजेंडा नहीं बदलना चाहिए इंदौर बड़ा शहर है। जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के हिसाब से प्लानिंग करवा देते हैं। जरूरत है कि प्लानिंग पूरे शहर को ध्यान में रखकर की जाए। अधिकारी-जनप्रतिनिधि बदलते हैं तो एजेंडा भी बदल जाता है। कई बार प्लानिंग तो दिल खोलकर कर लेते हैं, लेकिन उसके लिए उतना बजट नहीं होता। इसलिए काम अधूरे रह जाते हैं। प्लान बनते ही लागू हो जाए, तो ही सफल होंगे। देरी होते ही स्टडी, रिपोर्ट और सोच बदल जाती है।(
एक पूर्व आईएएस अधिकारी, जो इंदौर में कई पदों पर रह चुके)



