मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में गांधी जयंती से लागू होगा जेलों में सुधार का कानून: कैदियों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर सेल में रखने, पुनर्वास का प्रावधान

भोपाल डेस्क :

प्रदेश की जेलों में दो अक्टूबर से जेलों में सुधार के लिए मोहन सरकार द्वारा लाए गए कानून पर अमल शुरू होगा। महात्मा गांधी की जयंती के दिन से सरकार कैदियों के लिए बनाए गए कानून के आधार पर जेलों में बदलाव के लिए काम शुरू करेगी और उनके पुनर्वास और समाज में एकीकरण की दिशा में किए जाने वाले उपायों पर फोकस कर वर्किंग की जाएगी। सरकार इसके लिए केंद्रीय जेल के साथ जिला और उपजेलों की व्यवस्थाओं में बदलाव भी लाएगी ताकि जेलों में क्षमता से अधिक मौजूद कैदियों, विचाराधीन बंदियों को बैरक, सेल और अन्य सुविधाएं मिल सकें।

मध्य प्रदेश सुधारात्मक सेवाएं और बंदीगृह अधिनियम 2024 को विधानसभा में जुलाई में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। केंद्र सरकार के द्वारा कैदियों की सुविधाओं और जेल में रहने के दौरान उनके आचरण में बदलाव तथा पुनर्वास को लेकर तैयार किए गए प्रावधानों के आधार पर यह कानून बनाया गया है जिस पर डेढ़ माह काम शुरू होने वाला है।

कैदियों की समस्या निराकरण के लिए बनेंगे बोर्ड

इस अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि कैदियों की शिकायत निवारण के लिए सिस्टम डेवलप किए जाएंगे। इसके लिए जेल और सुधारात्मक संस्था विकास बोर्ड बनाकर कैदियों को सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए बंदीगृह और सुधारात्मक संस्था विकास बोर्ड की स्थापनी की जाएगी। कैदियों को निशुल्क विधिक सहायता दी जाएगी।

बचाव और सुरक्षा पर भी फोकस

कैदियों के बचाव और सुरक्षा के उपाय करने का काम तेज होगा। उनके आवास, भोज, कपड़े, स्वच्छ व पर्याप्त जल, प्रसाधन सामग्री, चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के काम में कसावट लाई जाएगी। कैदियों के सामाजिक पुनर्वास और समाज में दोबारा उनके एकीकरण को लेकर देखभाल व सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

अलग सुविधाएं देने के होंगे प्रबंध

अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि जेल में कैदियों के रहने के लिए बैरक, खुला क्षेत्र, रसोई घर समेत अन्य सुविधाओं की उपलब्धता पर सरकार फोकस करेगी। विभिन्न श्रेणी के कैदियों के अलग-अलग स्थानों पर रखने की सुविधा के लिए काम किया जाएगा। जहां हाई सिक्योरिटी कारागार की अलग व्यवस्था नहीं हो वहां पर हाई रिस्क वाले कैदियों और आदतन अपराधियों क अलग किया जाएगा और इन्हें अलग बैरक और सेल में रखा जाएगा ताकि अन्य कैदियों से घुल मिल न सकें।

अलग-अलग कैटेगरी के कैदी चिन्हित करेंगे

कानून में व्यवस्था तय की गई है कि सरकार अलग अलग कैटेगरी वाले कैदियों के लिए सुधार संस्थाएं बनाएगी जिसमें केंद्रीय जेल और सुधारात्मक संस्था, जिला जेल और सुधारात्मक संस्था, उप जेल और सुधारात्मक संस्था, खुली सुधारात्मक संस्था, केवल महिला कैदियों के लिए जेल और सुधारात्मक संस्था और अल्प उम्र वाले अपराधियों के लिए सुधारात्मक संस्था खोली जाना है।

एक डायरेक्ट्रेट बनेगा जो प्रशासनिक सिस्टम देखेगा

सरकार द्वारा बनाए गए कानून में प्रावधान किया गया है कि प्रदेश में कैदी और सुधारात्मक सेवा का एक डायरेक्ट्रेट होगा जो सरकार द्वारा लागू की जाने वाली नीतियों को क्रियान्वित कराने के लिए जवाबदेह होगा। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पदस्थापना की जाएगी। हर जेल में एक अधीक्षक और अन्य अधिकारी होंगे जिनकी जिम्मेदारी होगी कि वे जेल में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। इसमें चिकित्सा अधिकारी की भूमिका पर भी खास ध्यान रखा जाएगा जो कैदियों की मृत्यु पर रिपोर्ट देने के साथ अन्य रिपोर्ट अधीक्षक को देगा।

जेलों का डेटाबेस होगा कम्प्यूटराइज्ड

सरकार जेल और सुधारात्मक संस्था को कम्प्यूटरीकृत करेगी और डेटाबेस को जेल प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की कम्प्यूटरीकृत सिस्टम के साथ एकीकरण करने का काम करेगी। सरकार ने इस कानून में यह प्रावधान भी किया है कि कैदियों के प्रवेश, उनके स्थानांतरण को लेकर भी प्रबंधन किया जाएगा।

इन अलग कैटेगरी में बांटे जाएंगे कैदी

कैदियों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाएगा जिसमें सिविल कैदी, अपराधिक कैदी, नजरबंद कैदी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा दोष सिद्ध कैदी, विचाराधीन कैदी, मादक पदार्थों के सेवन के आदी और शराबी अपराधी, पहली बार के अपराधी तथा विदेशी कैदी के रूप में भी इनका विभाजन किया जाएगा। इसी कैटेगरी में आदतन अपराधी, हाई रिस्क वाले कैदी, वृद्ध और अशक्त कैदी, मृत्युदंड पाए कैदी, मानसिक रोग से ग्रस्त कैदी, संक्रामक और पुरानी बीमारियों से पीड़ित कैदी, आवर्ती अपराधी, महिला कैदी, महिला कैदी के साथ बच्चे, पुरुष कैदी के साथ बच्चे, युवा अपराधी भी शामिल किए गए हैं। इन्हें अलग-अलग बैरक और सेल में रखा जाएगा।

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