
इंदौर डेस्क :
इंदौर नगर निगम के पक्ष में एक बड़ा फैसला आया है। लालबाग के पास करबला मैदान की जमीन का मालिकी हक नगर निगम का माना गया है। कोर्ट ने करबला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन का वक्फ बोर्ड की नहीं मानी है।
निगम की तरफ से दीवानी अपील दायर की गई थी। जिसे स्वीकारते हुए 15वें जिला न्यायाधीश नृसिंह बघेल की कोर्ट ने निगम के पक्ष में डिक्री पारित कर दी है। निगम ने अपील में पंच मुसलमान करबला मैदान कमेटी और वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।
कोर्ट ने ये माना
वादग्रस्त भूमि खसरा नंबर 1041 रकबा 6.70 एकड़, जिसका म्यूनिसिपल खसरा नंबर 17017 का स्वामित्व प्रमाणित किया है। निगम स्वामित्व की घोषणा की डिक्री प्राप्त करने के हकदार हैं।
न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं डिक्री दिनांक 13 मई 2019 को पलटते हुए निगम की अपील स्वीकार की जाती है और उसके पक्ष में डिक्री पारित कर यह घोषित किया जाता है कि वादग्रस्त भूमि का स्वामी इंदौर नगर निगम है।
निगम यह प्रमाणित करने में असफल रहा हैं कि प्रतिवादीगण वाद ग्रस्त भूमि पर अवैध रूप से दीवार बनाकर अतिक्रमण करने का प्रयास कर रहे हैं।
ऐसी स्थिति में वादी/अपीलार्थी के पक्ष स्वत्व घोषणा की डिक्री पारित किया जाना उचित होगा और प्रतिवादी गण के विरुद्ध स्थायी निषेधाज्ञा जारी किये जाने योग्य मामला नहीं है। इसी तरह प्रतिवादीगण यह प्रमाणित करने में असफल रहे हैं कि वाद ग्रस्त संपत्ति वक्फ संपत्ति है। प्रतिवादी गण यह प्रमाणित करने में सफल रहे हैं कि मोहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग विगत 150 वर्षों से वाद ग्रस्त संपत्ति के भाग पर ताजिए ठंडे करने का धार्मिक कार्य करते चले आ रहे हैं।
तब वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्ट्रेशन
पूर्व में निगम ने वाद दायर किया था जिसे कोर्ट ने 2019 में निरस्त कर दिया था। इसके विरूद्ध अपील की गई थी। निगम का कहना था कि वो जमीन का मालिक है। जमीन से लगी सरस्वती नदी के पास के मात्र 0.02 एकड़ भूमि ताजिए ठंडे करने के उपयोग में आती है। जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं पंच मुसलमान करबला मैदान कमेटी और वक्फ बोर्ड का कहना था कि 150 साल पहले इंदौर के श्रीमंत राजा ने वाद ग्रस्त स्थान को मुस्लिम समाज को मोहर्रम त्योहार और ताजिए ठंडे करने के लिए दिया था। 29 जनवरी 1984 को इसका वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ।



