बाघों के नाम पहचान का आधार… शरीर पर बनी धारियां, पगमार्क और उनका इलाका, अब टी-1, टी-2 नहीं; शहर के 15 बाघों की पहचान बीटी यानी भोपाल टेरेटरी से होगी
भोपाल डेस्क :
भोपाल वन मंडल में मूवमेंट कर रहे 15 बाघों का नया नामकरण हो गया है। अब इन्हें इनके मूवमेंट के हिसाब से पहचाना जाएगा। साल 2022 की गणना में भोपाल के आसपास घूम रहे 15 बाघों की पहचान हुई है। इनके नए नाम और पहचान को देहरादून वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट भेजा गया है।
इसी तरह सीहोर के बाघों को वहां की रेंज व सब रेंज, जबकि औबेदुल्लागंज वन डिवीजन के बाघों को रतापानी सेंचुरी के बाघ कहा जाएगा। इन बाघों काे नई पहचान औबेदुल्लागंज वन डिवीजन के तत्कालीन डीएफओ विजय कुमार और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के पीएचडी स्कॉलर डीपी श्रीवास्तव ने दी है। बता दें कि भोपाल वन रेंज में जितने भी बाघ हैं, वो टाइगर टी-1 और बाघिन टी-2 के वंशज हैं।
भोपाल के आसपास के बाघों के नए नाम और पहचान का डेटा देहरादून के वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को भेजा
पहचान का आधार… शरीर पर बनी धारियां, पगमार्क और उनका इलाका
भोपाल के डीएफओ आलोक पाठक का कहना है कि भोपाल वन मंडल के 15 बाघों और उनके शावकों की पहचान पगमार्क, उनकी शरीर पर बनी धारियों और लैंड आधार पर की गई है। पहले इस रेंज के बाघ टी-1, टी-2, टी121 से पहचाने जाते थे, अब बीटी यानी भोपाल टेरेटरी से पहचाने जाएंगे। बीटी का अर्थ है, केवल भोपाल में मूवमेंट वाले बाघ और एसटी, आरटी यानि संबंधित बाघ का मूवमेंट भोपाल से लेकर सीहोर और रातापानी सेंचुरी तक है। इसमें बाघ बीटी 3, एसटी/ आरटी 21 बाघिन, बाघिन एसटी 21-322, बाघ एएसटी 2-421, बाघिन बीटी123, बाघ बीटी 23-3, बाघ बीटी23-4,बाघ बीटी-8,बाघिन बीटी-9,बाघिन बीटी10, बाघिन बीटी 11, बीटी11- 81 वयस्क शावक, बीटी11-81 वयस्क शावक शामिल हैं। अभी बाघिन बीटी 123 के दो नए शावकों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
2010 में टी-1 मिला था नाम
नर बाघ टी-1 साल 2010 में पहली बार भोपाल आया था। फिर टी-2 बाघिन आई। अगस्त 2010 में टी-1 की मौत के बाद नया नर बाघ आया। उसे एनटी-1(न्यू टी1) नाम दिया। उसके बाद बाघिन टी 1 की बेटी टी-21 का दबदबा कायम रहा।



