विदिशा

शिक्षा विभाग में हड़कंप: फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवा कर विदिशा में बना शिक्षक, प्रमाण पत्र की जांच में हुआ खुलासा

विदिशा डेस्क :

एक युवक ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाकर शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। जब दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच की गई, तब मामला का खुलासा हुआ। इसके बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।

मुरैना के रहने वाले उपेन्द्र पाठक ने शिक्षा विभाग में नौकरी पाने के लिए मुरैना के जिला चिकित्सालय मुरैना के नाम से एक फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया था, जिसके आधार पर उपेंद्र को दिव्यांग कोटे से शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गई और 6 अक्टूबर 2021 को विदिशा के सिहोद में उच्च माध्यमिक शिक्षक संस्कृत के पद नियुक्ति मिली थी।

उपेंद्र पाठक ने मुरैना जिले से जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, उसी के आधार पर उसे दिव्यांगता के आधार पर नियुक्ति दी गई थी। जब शिक्षा विभाग ने दिव्यांगता प्रमाणपत्र की कलेक्टर मुरैना से जांच करवाई गई तो पता चला कि मुरैना जिला चिकित्सालय से उपेंद्र पाठक के लिए कोई भी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ था। इससे साफ हो गया था कि उपेंद्र पाठक ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की थी। अब लोक शिक्षण विभाग की आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव ने कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने और शपथ-पत्र में गलत जानकारी देकर नौकरी हासिल करने वाले उपेन्द्र पाठक की नियुक्ति निरस्त कर दी है।

सूत्रों की माने तो शिक्षक भर्ती परीक्षा में मुरैना जिले के सबसे ज्यादा दिव्यांग शिक्षक भर्ती हुए थे। दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर अकेले मुरैना से मध्य प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में 70 फीसदी दिव्यांग शिक्षक भर्ती हुए। जब शिक्षा विभाग में शिक्षकों की दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच कराई गई तो पता चला कि कई लोगों ने दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाए गए हैं, जिनका मुरैना के जिला चिकित्सालय में कोई रिकॉर्ड नहीं था, जिसके बाद फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाने वाले शिक्षकों पर कार्यवाही की जा रही है।

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