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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा “महाराजा लापता हो गए देखते देखते”

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा है। वीडियो में सिंधिया अलग-अलग मौकों पर राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महाकाल मंदिर में नजर आ रहे हैं। 

पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर यह वीडियो शेयर किया। 14 सेकंड के इस वीडियो को दो वीडियो क्लिप जोड़कर बनाया गया है। पहला भाग उस वक्त का है, जब राहुल गांधी उज्जैन आए थे। वीडियो में सिंधिया महाकाल मंदिर के गर्भगृह में राहुल के साथ पूजा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो का दूसरा हिस्सा मंगलवार का है, जब पीएम मोदी महाकाल लोक का लोकार्पण करने के लिए उज्जैन पहुंचे थे।

वीडियो के दूसरे हिस्से में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गर्भगृह में बैठकर पूजा करते दिख रहे हैं, जबकि सिंधिया गर्भगृह के बाहर पीछे बैठे हुए हैं। वीडियो को शेयर करते हुए दिग्विजय सिंह ने लिखा कि “महाराज लापता हो गए देखते देखते।” इस वीडियो को कांग्रेस के सोशल मीडिया के संयोजक और राजस्थान कांग्रेस के प्रवक्ता ने शेयर किया था, जिसे दिग्विजय ने शेयर किया।

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जयवर्धन सिंह ने कहा था- ‘ग्वालियर की पनौती’ भाजपा में गई 

इससे पहले बुधवार को भोपाल में हुए कांग्रेस के सम्मेलन में दिग्विजय सिंह के बेटे और गुना की राघौगढ़ विधानसभा सीट से विधायक जयवर्धन सिंह ने बिना नाम लिए सिंधिया को पनौती बताया था। उन्होंने कहा था, ‘ग्वालियर की पनौती’ भाजपा में चली गई। इसी वजह से ग्वालियर में 57 साल बाद कांग्रेस का मेयर बन पाया है। बोले- मैं तो स्पष्ट यही कह रहा हूं कि जो परिणाम आया है, आपके सामने है। जयवर्धन ने कहा, मूल बात यह है कि कांग्रेस को 57 साल बाद ग्वालियर में जीत मिली है। जब सिंधिया जी भाजपा में गए, तब चर्चा ये थी कि अब कांग्रेस खत्म हो गई है। ग्वालियर-चंबल में इतना बड़ा परिणाम आया है तो वो कार्यकर्ताओं की मेहनत से ही आया है।

काफी पुरानी है दोनों के बीच की अदावत

बता दें कि ‘किले’ (दिग्विजय सिंह) और ‘महल’ यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीतिक अदावत काफी पुरानी है। इसमें थोड़ी नरमी उस समय जरूर आई थी, जब कांग्रेस में रहते हुए जयवर्धन सिंह के बुलावे पर सिंधिया राघौगढ़ किले पर पहुंचे थे। हालांकि, अब दोनों अलग-अलग पार्टियों में हैं और इस वजह से वर्षों से महल और किले के बीच खिंची लक्ष्मण रेखा भी अब टूट चुकी है।

सिंधिया ने पिछले साल दिग्गी के गृहनगर राघौगढ़ में जाकर आमसभा की और उनके करीबी को भाजपा में शामिल करा लिया। यह पहला मौका था- जब सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के इलाके में आमसभा ली थी। अब कांग्रेसी लगातार सिंधिया को आड़े हाथ ले रहे हैं। हालांकि, सिंधिया ने अब तक न तो दिग्विजय सिंह पर की और न ही जयवर्धन सिंह पर व्यक्तिगत टिप्पणी की है।

9 दिसंबर 2021: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सिंधिया पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा- इतिहास गवाह है कि एक व्यक्ति गद्दारी करता है, तो उसकी पीढ़ी दर पीढ़ी गद्दारी करती है। वह गुना के मधुसूदनगढ़ में कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार तो बन गई थी। सिंधिया जी चले गए छोड़कर और 25-25 करोड़ रुपए ले गए एक-एक विधायक का। कांग्रेस के साथ गद्दारी कर गए, इसका मैं क्या करूं। किसने सोचा था। जनता ने तो कांग्रेस की सरकार बनवा दी थी। इतिहास इस बात का साक्षी है। एक व्यक्ति गद्दारी करता है, तो उसकी पीढ़ी दर पीढ़ी गद्दारी पर गद्दारी करती है। तो भाई, सोच समझ के गद्दारी करना।

3 मई 2022: पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने सिंधिया को अपना बयान याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह से उन्होंने कमलनाथ से कहा था कि अगर अतिथि शिक्षकों की समस्या हल नहीं हुई, तो मैं सड़कों पर उतर जाऊंगा। प्रदेश में अवैध रेत खनन का रिकॉर्ड कायम हो रहा है। पूरी भाजपा मुख्यमंत्री के परिवार से लेकर बीजेपी के छोटे-छोटे कार्यकर्ता रेत के अवैध कारोबार में लगे हैं। अब सिंधिया चुप क्यों है ?

5 जुलाई 2022: गुना में दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि महाराष्ट्र की तरह एमपी में भी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री और शिवराज सिंह चौहान को उप-मुख्यमंत्री बनाना चाहिए था। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शिवसेना के एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यही बात भाजपा के दोहरे चरित्र को दिखाती है। एमपी में केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने भाजपा से जुड़ने के लिए कांग्रेस छोड़ी, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। जबकि, महाराष्ट्र में जो इस पद का मुख्य दावेदार था, उसे उप-मुख्यमंत्री बना दिया।

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