विदिशा

रामकथा पांचवां दिन: मोरारी बापू ने दिया समरसता का संदेश, हकीकत सुनाई: सुबह 11:00 बापू को सच्चे मन से याद किया, शाम 4:00 बजे बापूजी घर पहुंच गए

आनंदपुर डेस्क :

संतसरलचितजगतहित
पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी कहते है संत सरल हृदय और जगत के हितकारी होते हैं ये लिखा हुआ तो है लेकिन जो लिखाहुआहोवोदिखा भी कल ये अद्भुत था और ये कल शाम यहाँ विदिशा में हमें दिखा की संतह्रदय कितने सरल होते है हुआ यूँ कि कल शाम जब पूज्य बापू रोजाना की तरह भिक्षा लेने निकले तो एक कुटिया नुमा झोंपड़ी दिखाई दी तो बापू ने गाडी अचानक रुकवा दी घर का मालिक तुरंत देखते ही बाहर आया और बापू को अन्दर आने की मनुहार करी बापू भी तुरंत उनके आग्रह को स्वीकार करके अन्दर चले गए घर कच्चाथामगरसच्चाथा और इतना निर्मल स्वच्छऔरसच्चा था कि बापू ने कुछ देर रुकने के बाद सभी साथ वालों को कहा कि आज रात्रिविश्राम यहीं करेंगे हवन और और भोजन भी यहीं करेंगे सभी आश्चर्यवम्चकित हो गए I
पास में एक मंदिर था पुजारी भी आया और आग्रह किया कि आप मंदिर भी पधारिये बापू का जवाब था
हमारातोमंदिरयहींहै


अब मंदिर क्या करना है वहां पर गौमाता भी थी गोबर लिपा आँगन था और ग्रामीण देहाती अहीर परिवार था तो बापू को सावित्रीमाँ की स्मृति हो आई और बचपन याद आ गया बापू ने बताया कि अभाव का जो सुख होता है वो अलौकिक होता है वो नसीब से ही मिलता है शायद इसी स्मृति ने उन्हें रात्रि विश्राम के लिए भी प्रेरित किया हो I
बड़े प्रेम से चाय तैयार की गई और भोजन तैयार हुआ सभी लोगों ने भोजन प्रशाद लिया और बापू ने सभी को बोल दिया आप जाइए हम तो आज यही रहेंगे ये आदेश सुनकर एक बार तो सभी सन्न रह गए लेकिन संत_आज्ञा थी जो भी साथ थे सभी आश्चर्यचकित हो गए और स्थिति ऐसी कि जैसे अंगद को प्रभु राम विदाई दे रहे हो मगर संत का आदेश तो पत्थर की लकीर बड़े भारी मन से हम अपने स्थान पर आये बापू ने बोल दिया सुबह पांच बजे गाडी भेज दीजियेगा I
बाबु लाल जी अहिरवार का परिवार था शायद कोई जन्म जन्मान्तर का संत सम्बन्ध रहा होगा और आँगन तैयार हुआ होगा संत आगमन को ये संत कृपा और ईश् कृपा है खैर जो भी हो मगर हमारे


ह्रदय में ये शाम तो जैसे पत्थर की शिला पर अंकित होती है ऐसे अंकित हो गई I
बालकाण्ड का दोहा है जो यहाँ लिखना ही होगा जो भाव आज घटित हुआ है वो यूँ का यूँ लिखा है
संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।
बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु II
अर्थ :जी संत सरल हृदय और जगत के हितकारी होते हैं, उनके ऐसे स्वभाव और स्नेह को जानकर मैं विनय करता हूँ, मेरी इस बाल-विनय को सुनकर कृपा करके राम के चरणों में मुझे प्रीति दें॥

इस अवसर पर राकेश अहिरवार ने बताया कि मैं खेत पर धनिया काटते हुए अपने दोस्त से बोल रहा था कि बापूजी हमारे घर आ जाएं तो मजा आ जाएगा। और शाम को 4:00 बजे मैं घर पहुंचा तो बापू हमारे घर पर ही मिले इसी को कहते हैं यदि सच्चे मन से किसी को याद करो तो वह जरूर आपको प्राप्त होता है और मैं बापू को अपने घर पर पाकर अपने आप को बड़ा ही सौभाग्यशाली मानता हूं।

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