मध्यप्रदेश

MP पटवारी भर्ती कैंसिल करने की मांग को लेकर हल्लाबोल, प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए: वल्लभ भवन कूच कर रहे थे; क्लीन चिट पर इसी महीने हुए भर्ती के आदेश

भोपाल डेस्क :

मध्यप्रदेश में पटवारी भर्ती रद्द करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया है। भोपाल में प्रदर्शन के लिए जुटे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर कराना चाहते हैं। उनका यह भी कहना वे अब दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जुटेंगे।

नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के बैनर तले अभ्यर्थी भोपाल के MP नगर चौराहे पर जुटे। यहां धरना देने के बाद वल्लभ भवन की ओर कूच कर गए। पुलिस ने उन्हें व्यापम चौराहे पर बैरिकेड लगाकर रोक लिया। वे आगे बढ़ने की जिद पर अड़ गए। इस पर पुलिस ने कांग्रेस मुख्यालय के नजदीक कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया।

हिरासत में लिए जाने पर प्रदर्शनकारी बोले कि पूरे प्रदेश के छात्र यहां जुटेंगे। ऐसी तानाशाही नहीं चलेगी। युवाओं पर अत्याचार नहीं चलेगा। इंदौर की ललिता को भी हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि हम खुद आकर गाड़ी में बैठ गए। उन्हें मिलाकर 11 लड़कियों को हिरासत में लिया गया है।

बता दें, पटवारी भर्ती परीक्षा का रिजल्ट 30 जून 2023 में आया था। धांधली के आरोप पर तत्कालीन शिवराज सरकार ने जांच होने तक नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। 19 जुलाई 2023 में जांच के लिए आयोग गठित हुआ। 8 महीने जांच चली। रिटायर्ड जस्टिस राजेंद्र वर्मा ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी।

भर्ती परीक्षा को क्लीन चिट मिलने के बाद 15 फरवरी को प्रदेश की डॉ. मोहन सरकार ने चयनित अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति के आदेश जारी किए। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया, ‘कर्मचारी चयन मंडल के ग्रुप-2, सब ग्रुप-4 और पटवारी भर्ती परीक्षा के घोषित परिणाम के आधार पर ही नियुक्ति की जाए।’

अभ्यर्थी बोले- जांच निष्पक्ष होती तो तमाम लोग जेल में होते

NEYU संगठन के रंजीत किसानवंशी ने कहा, ‘संगठन की सरकार से मांग है कि इन नियुक्तियों पर रोक लगाई जाए। राजेंद्र कुमार वर्मा कमेटी की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करे।’

अभ्यर्थियों ने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट जारी किए पिछले दरवाजे से 10-15 लाख में पेपर खरीदने वालों को नियुक्ति दी जा रही है। इस परीक्षा में 45 से 50% घोटाला हुआ है। निष्पक्ष जांच होती तो यह तमाम लोग जेल में होते। सरकार डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर चंद फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले छात्रों पर कार्रवाई की बात कर रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि एक सदस्य जांच कमेटी के पास जांच के तकनीकी संसाधन नहीं थे। ऐसे में यह जांच केवल बयानों के आधार पर हुई है। एक व्यक्ति का प्रदेशभर में शिकायतों की जांच करना आसान काम नहीं है, क्योंकि यह ऑनलाइन परीक्षा है। बिना टेक्निकल एक्सपर्ट के सभी पहलुओं की जांच करना संभव नहीं है।

सरकार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे, हम स्वीकार कर लेंगे

ग्वालियर के रुचिन अरजरिया ने कहा, ‘सरकार से बस इतना कहना चाहता हूं कि आपने क्लीन चिट दी, हम रिपोर्ट स्वीकार कर लेंगे, बस आप रिपोर्ट सार्वजनिक कर दीजिए। यह लड़ाई नौकरी की नहीं, न्याय की है।’ ब्यावरा के राजगढ़ से आए मोहित शर्मा ने कहा, ‘सरकार द्वारा गठित जांच आयोग को मैंने सबूत दिए थे। 4 सवाल सॉल्यूशन समेत सब्मिट किए। आयोग ने मुझे बिना स्टाम्प-सील लेटर दे दिया। पूरे देश में यह एकमात्र भर्ती है, जिसके टॉपर घरों में छिपकर बैठे हैं।’

इन सवालों के जवाब चाह रहे अभ्यर्थी

  • ग्वालियर के एक परीक्षा केंद्र से 10 में से 7 टॉपर और प्रदेश के केवल 3 परीक्षा केंद्रों में से 50 में से 34 टॉपर कैसे आ गए?
  • क्या टॉपर से बातचीत करके उनके बयान लिए गए?
  • क्या उनके बीच के आपसी संबंध और कनेक्शन को चेक किया गया?
  • क्या टॉपर की 10वीं, 12वीं की मार्कशीट की जांच की गई। कुछ चयनित अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने 10वीं और 12वीं की परीक्षा 35% नंबरों से पास की।
  • कुछ चयनित अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जो वनरक्षक भर्ती परीक्षा में फिट थे, लेकिन पटवारी भर्ती परीक्षा में एयर हैंडिकैप्ड यानी उन्हें कानों से सुनाई नहीं देता? यह कैसे संभव है?
  • टॉपर का लॉग इन टाइम चेक किया जाए, जिससे यह पता चले कि उसने कितने बजे सिस्टम पर लॉगिन किया?
  • क्या टॉपर की कैंडिडेट रेस्पॉन्स लॉग की जांच की गई, जिससे पता चलता है कि छात्र ने कब और कितने समय में कौन सा जवाब दिया? कब उसने जवाब के विकल्प को बदला?
  • क्या पेपर को 3 घंटे में हल किया या आधे – एक घंटे में ही सारे जवाब फिल कर दिए?
  • मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड यानी ESB के सर्वर की टेक्निकल जांच की गई?

इन मांगों को लेकर आंदोलन

  • पटवारी फर्जी नियुक्ति प्रक्रिया तत्काल रद्द की जाए।
  • पटवारी भर्ती को रद्द करके 6 महीने के अंदर पुन: परीक्षा कराई जाए।
  • पटवारी घोटाले की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
  • मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में तकनीकी विशेषज्ञों की SIT गठित की जाए
  • फर्जीवाड़े में शामिल दोषियों को सजा दी जाए।

8 महीने की जांच में क्या हुआ?

  • भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा सहित अन्य संभागों के छात्रों ने जांच आयोग के दफ्तर में आकर बयान दर्ज कराए। छात्रों ने परीक्षा में धांधली की आशंका वाले कई तथ्य पेश किए, लेकिन इनके पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर पाए। जस्टिस वर्मा खुद अलग-अलग परीक्षा सेंटर पर गए।
  • जस्टिस वर्मा ने ग्वालियर के एनआरआई कॉलेज सहित कुछ दूसरे परीक्षा सेंटर्स की भी जांच की। इसमें व्यापमं से मांगी गई जानकारी से यहां की पूरी प्रक्रिया को वेरिफाई किया गया। इसमें बताया गया है कि किसी खास सॉफ्टवेयर की मदद से यदि कोई सिस्टम को रिमोट पर ले लें, बस यही धांधली की आशंका है। बाकी सिक्योरिटी प्रोटोकॉल में कहीं कोई गड़बड़ी नजर नहीं आ रही है, लेकिन सिस्टम को रिमोट पर लिए जाने के संबंध में कोई पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सका है।

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