मेडिकल कॉलेज के अस्पताल को मिला NABH प्रमाण पत्र: कॉलेज के 60 फीसदी डॉक्टरों ने कैपिटल लेटर में लिखा सब्सक्रिप्शन, इसलिए मिला एनएबीएच
विदिशा डेस्क :
अटलबिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज का अस्पताल प्रदेश का ऐसा पहला सरकारी अस्पताल है जिसे एनएबीएच प्रमाण-पत्र मिला है। हालांकि रीवा को भी मिला है लेकिन वो सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल है। मेडिकल कॉलेज के हास्पिटल को नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल (एनएबीएच) एंड हेल्थ केयर प्रोवाइडर की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मान्यता मिल गई है।
इस मान्यता के लिए 700 मानकों पर खरा उतरना होता है। इसके पीछे कई कर्मचारियों की मेहनत है। इसकी मुख्य वजह ये है कि जब टीम दौरा करने आई थी तब सर्वे में पाया गया कि विदिशा मेडिकल कॉलेज के हास्पिटल में 60 फीसदी डॉक्टर सब्सक्रिप्शन कैपिटल लेटर में लिखते हैं। इसका फायदा प्रमाण-पत्र लेने में हुआ।
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ सुनील नंदेश्वर ने बताया कि सब्सक्रिप्शन कैपिटल लेटर में लिखने के अलावा दवा को खाने की विधि हिंदी में लिखते हैं ताकि मरीज को समझने में आसानी हो। इसके अलावा डिस्चार्ज कार्ड में स्पष्ट बताना होता है कि मरीज को कब आना है।
सभी तरह की मॉकड्रिल देखी:
डीन डॉ सुनील नंदेश्वर ने बताया कि हास्पिटल में इलेक्ट्रिक सेफ्टी, फायर सेफ्टी और पॉल्यूशन बोर्ड के सर्टिफिकेट की जांच की गई। हमनें संबंधित संस्थाओं से ये प्रमाण-पत्र ले लिए थे। इसलिए हम एनएबीएच के मानकों पर सही पाए
हार्टअटैक के लिए हर महीने कोड ब्लू मॉकड्रिल की जाती है। इसमें अचानक बेहोशी वाले डाक्टर, मेडिसिन, सर्जरी और केजुअल्टी के डाक्टर को बुलाते हैं। इसके अलावा कोड रेड मॉकड्रिल करते हैं। इसमें हर महीने आग लगने की मॉकड्रिल होती है। वहीं कोड पिंक के तहत बच्चा चोरी होने की मॉकड्रिल की जाती है।
आईसीयू में हर 5 बेड पर एक नर्स
एनएचबीएच के लिए आईसीयू के हर बेड पर एक नर्स का नियम है लेकिन ज्यादातर छोटे हास्पिटल में ये नियम लागू हो जाता है। जबकि अपना हास्पिटल बड़ा है और आईसीयू में ही 100 बेड है। डीन ने बताया कि इसलिए हर 5 बेड पर एक नर्स हमारे पास है। हमनें जांच करने आए एसेसर्स को इस बात को बताया। वे हमारी बात पर राजी हो गए। इससे हमें एनएबीच प्रमाण-पत्र मिलने में आसानी हुई।
शुरू में ही 700 मानकों में से 600 के कर लिए थे काम
डीन डॉ सुनील नंदेश्वर ने बताया कि एनएबीएच की मान्यता लेने के लिए 700 मानक पूरे करने पड़ते हैं। इसमें साफ-सफाई, रखरखाव, पर्यावरण सुरक्षा, पैरामेडिकल स्टाफ, चिकित्सकों की योग्यता, अनुभव, उपलब्ध संसाधन, लैब, मशीनों-उपकरणों का स्तर, इंफेक्शन से बचाव के उपकरण होने चाहिए। हमनें शुरुआत में ही 600 मानक पूरे करने का दावा किया था। इसके बाद 100 दिन बाद अन्य मानक के लिए आवेदन दिया था।



