
उज्जैन डेस्क:
आज श्रावण माह का चौथा और अंतिम सोमवार है। शाम 4 बजे महाकाल भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। पालकी में श्री महाकालेश्वर श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में, गजराज पर श्री मनमहेश रूप, गरुड रथ पर श्री शिव तांडव प्रतिमा, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश जी स्वरूप में दर्शन देंगे।
मंदिर के सभा मंडप में भगवान की पालकी का पूजन होगा। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी जाएगी। सवारी के साथ घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र पुलिस बल, होमगार्ड के जवान, भजन मंडली, झांझ मंडली के सदस्य व पुलिस बैंड भी शामिल रहेंगे।
इससे पहले श्रावण माह के पहले सोमवार पर 2.5 लाख, दूसरे पर 3 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। तीसरे सोमवार को 4 लाख लोग पहुंचे थे। 4 अगस्त को श्रावण का आखिरी सोमवार होने की वजह से भक्तों की संख्या बढ़ने का अनुमान है।

तड़के ढाई बजे खुले मंदिर के कपाट
विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के 2.30 बजे भस्म आरती के दौरान मंदिर के कपाट खोले गए। भगवान महाकाल को जल अर्पित कर भस्म रमाई गई। पंचामृत अभिषेक पूजन कर भगवान महाकाल का भांग चंदन और आभूषणों से राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। भस्म आरती के बाद अब रात 10 बजे तक शयन आरती तक दर्शन का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। भस्म आरती के दौरान चलायमान दर्शन व्यवस्था में बिना परमिशन वाले भक्तों ने भी भस्म आरती में चलित दर्शन दर्शन किए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।

पंडित महेश पुजारी ने बताया कि श्रावण माह तपस्या का माह रहता है। महाकाल मंदिर में भगवान की दिनचर्या रोजाना की तरह रही। सुबह भगवान को भांग चंदन अर्पित किया गया। श्रावण माह में महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्त जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर उन्हें प्रसन्न करते हैं।
यहां जूते-चप्पल उतार सकेंगे श्रद्धालु
महाकाल मंदिर में अलग-अलग गेट से आने वाले श्रद्धालु अपने जूते-चप्पल त्रिवेणी संग्रहालय, महाकाल लोक प्लाजा, बड़ा गणेश के पास, हरसिद्धि मंदिर के पास मानसरोवर भवन के पास और प्रशासनिक भवन के पास उतार सकेंगे।
पांच स्वरूपों में होंगे महाकाल के दर्शन
बाबा महाकाल शाम 4 बजे भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान का पूजन-अर्चन कर पालकी में विराजित करने के बाद नगर भ्रमण के लिए रवाना होंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी जाएगी।

सवारी के साथ घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र पुलिस बल, होमगार्ड के जवान, भजन मंडली, झांझ मंडली के सदस्य व पुलिस बैंड शामिल रहेंगे। इस बार पालकी में श्री महाकालेश्वर श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में, गजराज पर श्री मनमहेश रूप, गरूड रथ पर श्री शिव तांडव प्रतिमा, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश जी स्वरूप में दर्शन देंगे।
पर्यटन की थीम पर झांकियां शामिल होंगी
बाबा महाकाल की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए प्रत्येक सवारी अलग-अलग थीम पर निकाली जा रही है। इस बार चौथी सवारी में मध्यप्रदेश के विभिन्न पर्यटन पर झांकियां शामिल होगी।
इसमें वन्य जीव पर्यटन के अंतर्गत मध्य प्रदेश के प्रमुख वन्य जीव पर्यटन स्थल कान्हा टाइगर रिजर्व, पेंच टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व एवं पन्ना टाइगर रिजर्व की झांकी होगी।
धार्मिक पर्यटन की झांकी में कृष्ण पथेय ओंकारेश्वर के आदि शंकराचार्य एकात्म धाम की झांकी रहेगी। ऐतिहासिक पर्यटन में ग्वालियर के किला, चंदेरी का किला, खजुराहो के मंदिर प्रदर्शित होंगे। ग्रामीण पर्यटन की झांकी में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा ओरछा में संचालित होम स्टे व ओरछा मंदिर की प्रतिकृति शामिल रहेगी।
जनजातीय व लोक कला के रंग भी
सवारी के दौरान 4 जनजातीय एवं लोक नृत्य कलाकारों के दल सहभागिता करेगें। जिसमे मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में धार से भगोरिया नृत्य, मोजीलाल ड़ाडोलिया छिंदवाड़ा का भारिया जनजातीय भड़म नृत्य, उज्जैन की कृष्णा वर्मा के नेतृत्व में मटकी लोक नृत्य, राहुल धुर्वे सिवनी के नेतृत्व में गोंड जनजातीय सैला नृत्य शामिल है।



