भोपाल

वित्तीय वर्ष खत्म: मध्यप्रदेश सरकार का 36% बजट लैप्स, लाड़ली लक्ष्मी के 924 कराेड़ के बजट में से सिर्फ 205 करोड़ ही खर्च

भोपाल डेस्क :

31 मार्च वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन था। खबर है कि सरकार इस 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 के बीच विभिन्न योजनाओं पर खर्च का जो बजट बनाया था, उसमें से 92180 करोड़ रु. खर्च ही नहीं हो पाए। साल 2022-23 के बजट में खर्च की लिमिट 2.79 लाख करोड़ रु. थी। इसमें से 1.87 लाख करोड़ रु. ही खर्च हो पाए। यानी 64% बजट ही खर्च हुआ। 36% लैप्स हो गया।

लाड़ली लक्ष्मी योजना पर सालभर 924 करोड़ रु. खर्च होने थे, लेकिन 205 करोड़ रु. ही खर्च हो पाए। बाकी पैसा लैप्स हो गया। बड़ी बात ये है कि जब लाड़ली लक्ष्मी के बजट को खर्च करने का प्रयास शुरू हुआ, तब साल खत्म हो रहा था। इसीलिए मार्च में 36 करोड़ रु. खर्च कर डाले। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का भी यही हाल रहा। इस पर 21 करोड़ रु. खर्च होने थे, लेकिन बाद में खर्च की लिमिट घटाकर 11.34 करोड़ रु. कर दी गई। इसमें से भी सिर्फ 6 करोड़ खर्च हो पाए। घरेलू हिंसा की पीड़िताओं के लिए बजट प्लान की 5% राशि खर्च हुई। 5 करोड़ 41 का बजट था। जिसे बाद में घटाकर 1 करोड़ 72 लाख किया गया। इसमें भी सिर्फ 29 लाख ही खर्च हो पाए।

37 विभागों ने किया 60 फीसदी से ज्यादा बजट खर्च, 12 का खर्चा 50 फीसदी से भी कम

सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, धार्मिक न्यास, परिवहन, खेल एवं युवक कल्याण, वन, उद्योग, ऊर्जा, किसान कल्याण, श्रम, स्वास्थ्य, नगरीय विकास, लोक निर्माण, स्कूल शिक्षा, विधि, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य, सामाजिक न्याय, नर्मदा घाटी विकास, जल संसाधन, पर्यटन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पशु पालन, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा, संसदीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा शिक्षा, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण, ग्रामीण विकास, आयुष, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग और अानंदम। राजस्व और खनिज विभाग 55 प्रतिशत बजट ही खर्च कर पाए। वित्त, वाणिज्यिकर कर, सहकारिता, पंचायत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, संस्कृति, मतस्य, विमानन, उद्यानिकी, प्रवासी भारतीय, पर्यावरण, लोक परिसंपत्ति विभाग का बजट खर्च 50 फीसदी से भी कम रहा।

मोटर ट्रांसपोर्ट दतिया पर खर्च हुए 10 करोड़ रुपए

  • मोटर ट्रांसपोर्ट स्कूल दतिया के लिए 10 करोड़ 38 लाख रुपए का बजट प्रावधान था, जिसमें से 10 करोड़ रुपए बगैर किसी आपत्ति के दे दिए गए और खर्च भी हो गए। यहां 99.96 प्रतिशत बजट का इस्तेमाल हुआ। सिर्फ 38 हजार रूपए की निकासी नहीं हो पाई।
  • धर्मशालाओं के निर्माण पर 1.50 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की योजना थी, जिसमें से 72 लाख रुपए खर्च लिमिट तय की गई। मार्च के महीने तक सिर्फ 36 लाख रुपए ही मिल पाए यह खर्च 24.31 प्रतिशत था। बजट में से 36 लाख रुपए लैप्स हो गए।
  • धार्मिक आस्था के स्थलों के जीर्णोद्धार पर 11 प्रतिशत बजट ही खर्च हो पाया। इस मद में 15 करोड़ रुपए का बजट प्लान था, जिसमें से जिसमें से 5 करोड़ रुपए ही खर्च करने की स्वीकृति दी गई। मार्च के महीने तक 1 करोड़ 66 लाख रुपए ही खर्च हो सके। यहां 4 करोड़ रुपए से ज्यादा लैप्स हो गए।
  • ओला पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए 75 करोड़ रुपए दिए का बजट प्लान था, जिसमें से 20 करोड़ 24 लाख रुपए ही स्वीकृत हुए। महज 26.99 प्रतिशत ही बजट खर्च हो पाया। 54 करोड़ रुपए की राशि लैप्स हो गई।
  • दुर्घटना में मृतकों के परिवारों को सहायता दिए जाने के लिए 2 करोड़ 77 लाख का बजट था, जिसमें से 1 करोड़ 29 लाख रुपए खर्च हो पाए। स्वीकृत बजट में से 1 करोड़ 48 लाख रुपए की राशि खर्च नहीं हो पाई।
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में किसानों को सम्मान निधि के लिए 4 करोड़ रुपए बजट प्लान था, जिसमें से सिर्फ 4.51 प्रतिशत ही राशि खर्च हुई। किसान सम्मान निधि का 3 करोड़ 81 लाख रुपए खर्च नहीं हो पाया।
  • खिलाड़ियों के छात्रावास की मरम्मत के लिए 50 लाख रुपए बजट का प्रावधान था जिसमें से 11 लाख 81 हजार रुपए ही खर्च हुए। यह राशि बजट की 23.5 प्रतिशत रही। छात्रावासों की मरम्मत पर 38 लाख रुपए खर्च नहीं हो पाए।
  • मुख्यमंत्री फसल बीमा ऋण योजना का बजट बजट 900 रुपए रखा गया, वित्तीय वर्ष खत्म होने पर भी बजट प्रावधान की राशि जस की तस थी। इसी तरह भावांतर फ्लेट रेट योजना के 1000 रुपए बजट प्रावधान के खर्च नहीं हुए।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का बजट 276 करोड़ रुपए था यह राशि केंद्र से प्राप्त हुई, लेकिन इसकी लिमिट घटाकर 128 करोड़ रुपए कर दी गई, जिसमें से सिर्फ 50 करोड़ रुपए खर्च हुए। इस तरह खर्च का प्रतिशत महज 18.21 प्रतिशत था। यहां 78 करोड़ रुपए लैप्स हुए।
  • डिफाल्टर किसानों के लिए ऋण माफी योजना के लिए 350 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान था जिसका उपयोग ही नहीं हुआ।
  • छात्रों के लिए विशेष कोचिंग व्यवस्था के लिए 18 लाख रुपए खर्च होना था जिसमें से 9 लाख रुपए ही खर्च हुए।

पिछड़ा वर्ग की बच्चियों को नहीं बंट पाई छात्रवृत्ति

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के तहत कक्षा 9 एवं 10वीं की छात्राओं के लिए 250 करोड़ रु. का बजट रखा गया था, जिसे घटाकर 222 करोड़ रु. कर दिया गया। इसमें से 29 फीसदी यानी 74 करोड़ रु. खर्च हुए। 175 करोड़ रु. का बजट लैप्स हो गया।

यहां खर्च में दरियादिली, कोई कटौती नहीं

मुख्यमंत्री के स्वेच्छानुदान में 200 करोड़ का बजट था, जिसमें सिर्फ 4 करोड़ की कटौती कर खर्च की लिमिट 196 करोड़ की गई। इसमें से 186 करोड़ 31 लाख रु. खर्च हो गए। इस मद में हुए खर्च पर सामान्य प्रशासन विभाग की मॉनीटरिंग रही, ताकि खर्च के लिए पैसा कम न पड़े। अकेले मार्च में एक दिन में 14 लाख 95 हजार का स्वेच्छानुदान स्वीकृत हुआ। मंत्रियों का स्वेच्छानुदान के लिए बजट प्रावधान 29 करोड़ का बजट प्रावधान था, इसमें यहां 70% बजट खर्च हुआ। 5 करोड़ लैप्स हुए।

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