भोपाल के एम्स में पहली बार आहार नली के कैंसर की सर्जरी: 4 घंटे में पूरा किया ऑपरेशन, यहां 5 हजार में हुई सर्जरी, मुंबई में 9 लाख तक का खर्च बताया था
भोपाल डेस्क :
एम्स के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में आहार नली के कैंसर से जूझ रहे मरीज की बेहद गंभीर सर्जरी की गई। डॉक्टरों की टीम ने पेट की आंत का उपयोग कर कृत्रिम आहार नली बनाकर मरीज को नया जीवन दिया। यह सर्जरी इसलिए भी जटिल और रोचक है क्योंकि मरीज के सीने, पेट और गले पर तीन अलग-अलग प्रोसीजर महज चार घंटों में पूरे किए गए।
सर्जरी के बाद 24 घंटे मरीज को आईसीयू में रखा गया और फिर वार्ड में शिफ्ट किया गया। मरीज की स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल है। उसे चार से पांच दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। एम्स के लिए यह सर्जरी इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार यहां एसोफैगस कैंसर सर्जरी यानी आहार नली के कैंसर की सर्जरी की गई है।
- सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग की टीम ने आंत से कृत्रिम आहार नली बनाकर वास्तविक नली से जोड़ा
- कैंसर ग्रसित आहार नली के 15 सेमी हिस्से को काटकर किया अलग, अब मरीज की स्थिति पूरी तरह से है कंट्रोल में
यहां 5 हजार में हुई सर्जरी, मुंबई में 9 लाख तक का खर्च बताया था
एम्स लाने से पहले मरीज को उनके परिजन प्राइवेट अस्पताल में भी दिखा चुके थे। उनको सर्जरी के लिए दिल्ली या मुंबई लेकर जाने की सलाह दी गई थी। जब परिजनों ने मुंबई के अस्पताल में पता किया तो वहां सर्जरी का खर्चा करीब 9 लाख रुपए बताया था। जबकि एम्स में उक्त सर्जरी महज 5 हजार रुपए में हो गई।
सर्जरी करने वाली टीम में ये रहे शामिल
आंकोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. विनय कुमार, एसआर में डॉ. सिद्धार्थ गुरवानी, डॉ. सोनवीर गौतम, डॉ. हर्ष साहू, एनेस्थेटिस्ट डॉ. मोली किरन और डॉ. सीमा के अलावा ओटी असिस्टेंट बुद्धि प्रकाश व ओटी टेक्नीशियन सोहन और हरी ओमकार।
जूस भी नहीं पी पा रहा था मरीज
इटारसी निवासी इस 48 वर्षीय मरीज को बीते साल जून-जुलाई में गले में परेशानी शुरू हुई थी। अक्टूबर में पता चला कि थर्ड स्टेज का कैंसर है। हालत बहुत बिगड़ चुकी थी, वे जूस तक नहीं पी पाते थे। सर्जरी से पहले 5 महीने इलाज चला। कीमोथेरेपी के चार कोर्स दिए गए। एडजुवेंट थेरेपी के तहत पांच किमी पैदल चलना और स्पिरोमेट्री एक्सरसाइज कराई। इससे मरीज ने लिक्विड डाइट और खाना भी लेना शुरू कर दिया था। इसके बाद सर्जरी की प्लानिंग की गई।
इस तरह से की गई सर्जरी
सबसे पहले मरीज का सीना खोला गया। सांस लेने में दिक्कत नहीं हो इसके लिए सिर्फ एक फेफड़े को एनेस्थीसिया दिया। दिल के पीछे से आहार नली निकाली फिर पेट को खोला और आंत से कृत्रिम आहार नली बनाई। अब गले के हिस्से को खोलकर कृत्रिम आहार नली को वास्तविक आहार नली से जोड़ा। इससे पहले आहार नली के कैंसर ग्रसित 15 सेमी हिस्से को अलग किया गया। अब दोबारा कैंसर का संक्रमण बढ़ने का खतरा भी नहीं है।



