मध्यप्रदेश

2 दिन में इंदौर के बंबई बाजार में जहां 80% दुकानें मीट की, वहां चला सरकारी बुलडोजर

इंदौर डेस्क :

इंदौर के बंबई बाजार में बीते दो दिन चली नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई चर्चा में है। इस क्षेत्र में करीब 32 साल बाद इतनी प्रभावी कार्रवाई हुई है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पहले आदेश में खुले में मांस-अंडे की दुकानों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। बंबई बाजार में यह अभियान उसी का हिस्सा है।

दरअसल नॉनवेज की छोटी होटलों व ठिए वालों ने बीते सालों में इस सघन और संवेदनशील क्षेत्र के 80 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। सड़क के दोनों तरफ इतना ज्यादा अतिक्रमण हो गया था कि इक्का-दुक्का वाहन भी बमुश्किल ही निकल पाते थे।

निगम के कचरा वाहनों को भी इस क्षेत्र में कचरा संग्रहण में काफी परेशानी होती थी। यहां कई नॉनवेज दुकानदारों ने सराफा की तर्ज पर ठेले वालों को भी सड़क किनारे की जमीन 200 से 500 रुपए रोज के किराए पर दे रखी थी।

पहले जान लीजिए बंबई बाजार की भौगोलिक स्थिति के बारे में…

6 सघन हिस्सों से घिरा है बंबई बाजार

बंबई बाजार इलाके की भौगोलिक स्थिति की बात करें तो वार्ड-68 में पड़ने वाला बंबई बाजार एक छोटा क्षेत्र है। लेकिन इससे लगे कड़ावघाट, मोचीपुरा, उदापुरा, मोहनपुरा, पिंजरा बाखल, सात गली आदि गलियां जुड़ी हैं। इसमें मुख्य बंबई बाजार है, जिसके 80 फीसदी हिस्से पर बीते सालों में नॉनवेज की होटल, ठिए वालों ने कब्जा जमा रखा है या ये समझें कि पूरा नॉनवेज बाजार ही है। यहां ग्राहकी अच्छी होने से खासा कारोबार होता है।

सड़क पर ऐसे बढ़ता गया अतिक्रमण

बंबई बाजार में प्रवेश करने के बाद सड़क के दोनों तरफ नॉनवेज की कई छोटी होटले हैं। बीते सालों में ग्राहकी ज्यादा बढ़ने से होटल के अंदर ग्राहकों के बैठने की जगह कम पड़ने लगी। ऐसे में इन होटल संचालकों ने नॉनवेज बनाने का सारा सामान होटल के बाहर ओटले पर रखना शुरू कर दिया था।

इसके बाद यहां आने वाले ग्राहकों के वाहन पार्क होने लगे। ऐसे में सड़क इतनी संकरी हो जाती थी कि अंदर दोपहिया वाहन तक बमुश्किल निकल पाते थे।

निगम के कचरा वाहनों को भी मुश्किल

रहवासियों के मुताबिक यहां शहर भर से नॉनवेज के शौकीन लोग नियमित आते हैं। यहां कई ठेले वालों ने भी नॉनवेज का धंधा शुरू कर दिया। कुछ दुकानदारों ने तो इनसे 200 से 500 रुपए तक प्रति दिन के लेने शुरू कर दिए थे।

दूसरी ओर बाकी 20% हिस्सों में जूते-चप्पल, बेकरी आइटम व अन्य दुकानें हैं। स्थिति ऐसी बन गई थी कि कचरा संग्रहण करने वाला निगम का कचरा वाहन भी यहां बमुश्किल निकल पाता था। शाम से देर रात तक तो दोपहिया वाहनों को निकलने में भी मुश्किल होती थी।

1991 में चलाया था ऑपरेशन बंबई बाजार और अब ऐसे हरकत में आया निगम

ऐसा भी नहीं है कि कार्रवाई महज दिखावा है या हाल ही में नगर निगम को अतिक्रमण के बारे में पता चला। दरअसल अति संवेदनशील इस क्षेत्र में 1991 में सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाया गया था। इसके पूर्व स्थिति ऐसी थी कि पुलिस-प्रशासन के मुखिया को भी इस क्षेत्र में अभियान चलाने की हिम्मत भी नहीं होती थी।

1991 में हुए दंगे के दौरान पुलिस ने इलाके में ऑपरेशन बंबई बाजार चलाया था। इस दौरान दंगाइयों ने एक बिल्डिंग की छत से भारी भरकम फर्शी फेंकी। उस समय तत्कालीन एसपी अनिल धस्माना इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे थे।

धस्माना के के पीछे चले रहे उनके बॉडी गार्ड छेदीलाल दुबे के सिर पर यह फर्शी गिरी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने एक हफ्ते तक बड़ा अभियान चलाकर यहां चल रहे सारे अवैध अड्‌डों को नेस्तनाबूद कर दिया था।

तब क्षेत्र के रसूखदार बाला बेग सहित अन्य पर कड़ी कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई कभी नहीं हुई। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुले में मांस बेचने के मामले में कार्रवाई के आदेश के बाद नगर निगम एक्शन में आ गया।

चूंकि अब बंबई बाजार में भी यह सबकुछ हो रहा था तो इसके चलते यहां भारी पुलिस बल की मौजूदगी में न केवल सारे अतिक्रमण हटाए गए बल्कि मॉनिटरिंग भी की जा रही है कि अब यहां ऐसे अतिक्रमण न हो।

इसलिए बदला कार्रवाई का रुख
इस बार निगम ने अतिक्रमण की कार्रवाई राजबाडा और उसके आसपास के हिस्सों से शुरू की थी, लेकिन फिर बंबई बाजार की ओर रुख कर लिया। नगर निगम के कर्मचारियों ने इससे पहले बार-बार बंबई बाजार में जाकर होटल संचालकों व दुकानदारों को समझाइश दी थी।

इसके साथ ही चेताया भी था कि इस बार हर हाल में अतिक्रमण हटेंगे। लेकिन जब दुकानदार नहीं माने तो सख्ती के साथ कार्रवाई की गई। इस दौरान कई लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण किसी की नहीं चली।

खुद यहां के रहवासी अतिक्रमण से परेशान थे। रहवासियों का कहना है कि तोड़े गए अतिक्रमण अभी क्षेत्र में ही बेतरतीब पड़े हैं। अगर इसे तुरंत उठा लिया जाए तो आवाजाही में काफी आसानी होगी। हालांकि निगम अधिकारी इस सच्चाई को सीधे तौर पर नहीं स्वीकारते। उनका मानना है कि शहर के ट्रैफिक में जो बाधाएं हैं उन्हें हटाया जा रहा है।

मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने सभी बाजारों के दुकानदारों-व्यापारियों से आग्रह किया है कि वे सुगम ट्रैफिक के मद्देनजर दुकानों के बाहर अतिक्रमण नहीं करें। ऐसी स्थिति होने पर निगम द्वारा पहले समझाइश दी जाएगी उसके बाद सख्ती से अतिक्रमण हटाया जाएगा।

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