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कोर्ट का अहम फैसला, चार साल की बच्ची के बलात्कारी को फांसी की सजा: गला घोंटा, मरा समझकर झाड़ियों में फेंका था, बुआ फूफा के घर दिवाली मानने आई थी मासूम बच्ची

न्यूज़ डेस्क :

खंडवा में चार साल की बच्ची से रेप कर हत्या की कोशिश करने वाले दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। साथ ही उम्रकैद की सजा भी दी है। आरोपी ने बच्ची का गला घोंट कर झाड़ियों में फेंक दिया था। फैसला शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश प्राची पटेल की कोर्ट ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जिस बर्बरता से आरोपी ने बच्ची के साथ घटना की, उसे देखते हुए मृत्युदंड की सजा से कम नहीं हो सकता। इसके लिए उम्रकैद पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक कि प्राण नहीं निकल जाएं।

घटना 31 अक्टूबर 2022 की है। मामले में कोर्ट ने 6 महीने के अंदर फैसला सुना दिया। आरोपी खालवा का रहने वाला राजकुमार (20) पिता गंगाराम है। पैरवी अभियोजन पक्ष से डीपीओ चंद्रशेखर हुक्मलवार ने की। सिलसिलेवार जानिए कैसे आरोपी ने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया…

31 अक्टूबर 2022। खंडवा से 10 किलोमीटर दूर जसवाड़ी गांव। आरोपी राजकुमार जसवाड़ी रोड पर स्थित राजपूत ढाबे पर काम करता था। ढाबे के पीछे ही आदिवासी परिवार रहता है। घटना वाले दिन चार साल की बच्ची परिवार के साथ खेत में बनी झोपड़ी में सो रही थी। राजकुमार सोती हुई बच्ची को रात में उठा ले गया। आरोपी बच्ची को रामनगर चौकी क्षेत्र में सुनसान क्षेत्र में ले गया। उसके साथ रेप किया। इसके बाद हत्या की नीयत से बच्ची का गला घोंटा। बच्ची के बेहोश होने पर उसे मरा समझकर घर से डेढ़ किलाेमीटर दूर झाड़ियों में फेंक दिया। इधर, परिवार वालों ने बच्ची की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी।

झाड़ियों में बेहोश मिली बच्ची

ढाबे के अन्य कर्मचारी से पता चला, तो शक के आधार पर पुलिस ने ढाबे पर काम करने वाले राजकुमार को पकड़ा। बच्ची के संबंध में पूछताछ की, तो वह कहने लगा कि उसे मारकर फेंक दिया है। आरोपी के बताए अनुसार झाड़ियों को हटाया, तो बच्ची अर्धनग्न हालत में पड़ी मिली थी। वह हिल-डुल रही थी। उसकी सांसें चलती देख तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उसे इंदौर रेफर कर दिया था। बच्ची की जान बच गई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।

फूफा के घर दिवाली मनाने आई थी मासूम

पंधाना थाना क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी परिवार की 4 साल की बच्ची एक सप्ताह पहले बुआ के साथ जसवाड़ी के पास स्थित एक गांव में फूफा के घर दिवाली मनाने आई थी। बच्ची के फूफा किसान के खेत में काम करते हैं। खेत में ही झोपड़ी बनी है। परिजन ने बताया कि रात में झोपड़ी में बच्ची और फुफेरा भाई खटिया पर सो रहे थे। अन्य लोग घर के बाहर सो रहे थे। सोमवार सुबह जब उठे, तो बच्ची नहीं थी। ढूंढने के बाद भी जब नहीं मिली, तो पिता को फोन कर बुलाया।

ऐसे हुआ ढाबे के कर्मचारी पर शक

झोपड़ी के ठीक पास में राजपूत ढाबा है। परिजन ने बताया कि रात आठ-नौ बजे ढाबे का वेटर खालवा निवासी राजकुमार घर आया। उसने सोने के लिए खटिया मांगी। घर से करीब 100 फीट दूर वह खेत में ही खटिया लगाकर सो गया। सुबह सिर्फ खटिया मिली, वह गायब था। इस कारण राजकुमार पर शक हुआ। ढाबा संचालक के एक कर्मचारी की मदद से पुलिस राजकुमार तक पहुंची।

रुपए लेकर गया, तो लौटकर नहीं आया

आरोपी राजकुमार जिस ढाबे पर काम करता है, उसके संचालक दिनेश के बेटे राजू ने बताया कि रविवार को हाफ डे काम करने के बाद राजकुमार चला गया था। शाम छह-सात बजे आया। उसने कहा कि पार्टी मनाना है 120 रुपए दे दो। मैंने रुपए दे दिए। फिर वह चला गया। राजकुमार रात को ढाबे पर ही सोता था। यहां सोने की काफी जगह है, लेकिन वह पहले से ही प्लानिंग के तहत बच्ची के घर खटिया मांगने गया था।

दूसरे को फंसाने के लिए बरगलाता रहा

पुलिस की पूछताछ में राजकुमार ने दिलीप नाम के अन्य शख्स का नाम भी लिया था। पूछताछ में बताया था कि दिलीप ने भी बच्ची के साथ रेप किया है। हालांकि जांच के दौरान दिलीप का वारदात में शामिल नहीं होना पाया गया। इसके बाद पुलिस ने दिलीप को आरोपी नहीं बनाया।

बच्ची के गले पर नाखून के निशान बने साक्ष्य

अभियोजन पक्ष के वकील चंद्रशेखर हुक्मलवार ने बताया कि आरोपी को सजा के दिलाने में मेडिकल जांचों की अहम भूमिका रही। बच्ची के शरीर पर चोट व गले पर नाखूनों के निशान मिले थे। ये निशान आरोपी राजकुमार के नाखूनाें के थे। डॉक्टरों की पैनल ने बच्ची के साथ सेक्शुअल असॉल्ट की पुष्टि की थी। अभियोजन ने तमाम साक्ष्य कोर्ट के समक्ष रखे। साक्ष्य जुटाने में एसआई व चौकी प्रभारी सुभाष नावड़े, महिला एसआई सुलोचना गहलोत, तत्कालीन कोतवाली टीआई बीएल अटोदे की खास भूमिका रही।

कोर्ट ने सुनाई फांसी और उम्रकैद

मामले में कोर्ट ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत आरोपी राजकुमार को मृत्यु दंड सुनाया। इसके अलावा धारा 307 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही, धारा 363, 450 और 201 के तहत 7-7 साल की सजा सुनाई है।

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