मध्यप्रदेश में एक आदिवासी को हराने गलियों में भटक रहे ‘महाराजा-महारानी’, उत्तराखंड-झारखंड के राजपरिवार भी आएंगे प्रचार करने

न्यूज़ डेस्क :
आदमी आजाद है, देश भी स्वतंत्र है…राजा गए रानी गई, अब तो प्रजातंत्र है… ‘वेलकम टू सज्जनपुर’ फिल्म का यह गाना चुनाव के बीच मध्य प्रदेश के एक विधानसभा क्षेत्र में जमकर गूंज रहा है। लोकतंत्र के महापर्व विधानसभा चुनाव में मुकाबला एक गरीब आदिवासी का रियासत के राजा से है। राजपरिवार चुनाव जीतने के लिए गांव की गलियों में ख़ाक छान रहा है. आदिवासी नेता से हार का खतरा इतना ज्यादा है कि महाराज-महारानी, युवराज- युवरानी और राजकुमारी को चुनाव प्रचार में दिन रात एक करना पड़ रहा है।
रीवा जिले की सिरमौर विधानसभा सीट में मुकाबला रोचक और दिलचस्प मुकाबला है। बघेलखंड की सबसे बड़ी रीवा रियासत ने 450 वर्षों तक हुकूमत चलाई। राजतंत्र के अंत के बाद प्रजातंत्र में भी राज परिवार की हिस्सेदारी रही। महाराज मार्तंड सिंह और राजमाता प्रवीण कुमार ने राजनीति की। इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए पुष्पराज सिंह विधायक और मंत्री बने।
अब इस रियासत के युवराज विधायक दिव्यराज सिंह को भाजपा ने सिरमौर विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने बड़ा दांव लगाते हुए रामगरीब वनवासी को मैदान में उतार दिया।
लिहाजा, एक तरफ क्षेत्र के आदिवासी अपने अपने नेता को जीतने के लिए प्रचार प्रसार कर रहे हैं, तो वहीं युवराज दिव्यराज सिंह को जीतने के लिए महाराजा पुष्पराज सिंह, महारानी युवरानी वसुंधरा सहित पूरा राज परिवार मैदान में उतर गया है।



