मध्यप्रदेश का चाय वाला लड़ चुका है 27 चुनाव: पार्षद से राष्ट्रपति तक चुनाव लड़ा, बोले-चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो मैं क्यों नहीं

ग्वालियर डेस्क :
ग्वालियर में विधानसभा चुनाव का जुनून अब सिर चढ़कर बोलने लगा है। ग्वालियर में एक चाय वाले ने बसपा से ग्वालियर पूर्व विधानसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है। यहीं से यह चाय वाला आनंद सिंह कुशवाह एकबार फिर चर्चा में है। चर्चा में भी क्यों न हो यह चाय वाला पार्षद से लेकर विधायक, सांसद, उपराष्ट्रपति व राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ चुका है।
अभी तक आनंद 27 बार चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। यह उनका 28 वां चुनाव होने जा रहा है। यह उनकी किस्मत ही है कि अभी तक 27 बार चुनाव में उनको हार का ही सामना करना पड़ा है। इस पर आनंद कहते हैं कि जब एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है ताे क्या मैं सांसद, विधायक नहीं बन सकता।

मध्य प्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का दौर जारी है। बुधवार को ग्वालियर में ग्वालियर पूर्व विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी की ओर से प्रत्याशी आनंद सिंह कुशवाह उर्फ रामायणी ने अपना नामांकन दाखिल किया है। इस दौरान वह बसपा के लिबाज में ही नामांकन दाखिल करने पहुंचे। नीला कुर्ता, नीली टोपी से वह सुर्खियों में रहे। जब आनंद के इस वेबाक अंदाज के बारे मंे पता किया तो जानकारी मिली कि यह अभी तक 27 बार चुनाव के मैदान में किस्मत अजमा चुके हैं वो बात अलग है कि अभी तक उनको सफलता नहीं मिली है। यह उनका 28वां चुनाव होने जा रहा है। इस बार उनको आशा है कि वह जीत दर्ज करेंगे।
आनंद सिंह का कहना है कि जब इस देश में चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है, तो मैं सांसद, विधायक क्यों नहीं बन सकता हूं। आनंद कुशवाहा इस बार विधानसभा चुनाव का नामांकन दाखिल करने के लिए साइकिल से पहुंचे थे। आनंद ग्वालियर के रहने वाले हैं, और वो एक छोटी चाय की दुकान चलाते हैं, लेकिन उनकी राजनीति में गहरी दिलचस्पी है। वे हर चुनाव में नामांकन करते हैं, उन्हें उम्मीद है कि एक ना एक दिन वह जरुर जीत दर्ज कर अपना किस्मत बदलेंगे।
1994 से लड़ रहे हैं चुनाव
नामांकन दाखिल करने के बाद आनंद सिंह कुशवाहा ने बताया कि वह पेशे से चाय वाले हैं, लेकिन साल 1994 से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। आनंद अब तक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सांसद, विधायक और पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार उन्होंने अपने जीवन में 28वीं बार नामांकन दाखिल किया है। वो बात अलग है कि पिछले 27 चुनाव में उनको जनता का प्यार नहीं मिलने की वजह से जीत नहीं मिली है, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आनंद सिंह बाकि नेताओं की तरह महंगी गाड़ियों से प्रचार करने नहीं निकलते, बल्कि वह अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं और साइकिल से ही पूरा प्रचार करते हैं।



